IAS अधिकारी का महिला अफसर से कथित दुर्व्यवहार, वीडियो वायरल होने पर उमर अब्दुल्ला सख्त
प्रताड़ना या प्रतिशोध का सामना न करना पड़े
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक आधिकारिक ऑनलाइन बैठक के दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) की एक महिला अधिकारी के साथ कथित तौर पर की गई अभद्रता को गंभीरता से लिया है। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि संबंधित महिला अधिकारी को इस मामले में किसी भी तरह की प्रताड़ना या प्रतिशोध का सामना न करना पड़े।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने जोर देकर कहा कि जवाबदेही तय होनी चाहिए और किसी को भी अपने पद का दुरुपयोग करके दूसरों को डराने-धमकाने या परेशान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सादिक ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा, माननीय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले का गंभीर संज्ञान लिया है और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जेकेएएस महिला अधिकारी के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न हो। जवाबदेही तय होनी चाहिए और किसी को भी अपने पद का दुरुपयोग करके दूसरों को डराने-धमकाने या परेशान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में 2010 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन (जो वर्तमान में श्रम और रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव हैं) कथित तौर पर 'मिशन यूथ अपलिफ्टमेंट एंड वाइब्रेंट एडवांसमेंट' (वाईयूवीए) की समीक्षा बैठक के दौरान, गांदेरबल में रोजगार और परामर्श विभाग की सहायक निदेशक बीनीश वानी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में रंजन को एक वर्चुअल मीटिंग के दौरान अपना आपा खोते हुए देखा जा सकता है। इसमें वह सुश्री वानी को कथित तौर पर अपशब्द कहते हुए सुनाई दे रहे हैं और साथ ही यह भी कह रहे हैं कि वह हमेशा उनसे इसी तरह बात कर सकते हैं । वीडियो में आईएएस अधिकारी अपने दफ्तर में मौजूद अधिकारियों को सुश्री वानी के निलंबनका आदेश तुरंत तैयार करने का निर्देश देते हुए दिख रहे हैं।
कुमार राजीव रंजन के प्रशासनिक नियंत्रण वाले श्रम और रोजगार विभाग ने इस वायरल वीडियो क्लिप की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए हैं।
नेकां के प्रवक्ता सादिक ने कहा कि इस घटना से यह भी पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलना कितना जरूरी है। सादिक ने कहा, अगर जम्मू-कश्मीर एक पूर्ण राज्य होता, तो कुमार राजीव रंजन के आचरण की औपचारिक जांच होने तक उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से संबद्ध कर दिया जाता। उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासन में जवाबदेही मजबूत करने के लिए राज्य का दर्जा बहाल करना बहुत जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली अधिकारी पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लगातार कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग ऊंचे पदों पर हैं, उन्हें अपने आचरण के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस बीच उसी बैठक का एक और वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें एक आईएएस अधिकारी जम्मू-कश्मीर की सिविल सेवा भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। इस वीडियो में अधिकारी कथित तौर पर यह दावा करते सुने जा सकते हैं कि कुछ उम्मीदवार सेटिंग के जरिए इस सेवा में आते हैं।

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