साहित्य जगत में शोक की लहर: मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन ; डिमेंशिया से थे पीड़ित, जानें कैसा रहा उनका जीवन?

शायरी के एक युग का अंत

साहित्य जगत में शोक की लहर: मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन ; डिमेंशिया से थे पीड़ित, जानें कैसा रहा उनका जीवन?
मोहब्बत और तन्हाई को खूबसूरत अल्फाज देने वाले प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र का बक़रीद के दिन 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। उनके जाने से साहित्य जगत में शोक की लहर है, लेकिन उनकी गजलें उर्दू अदब का गौरव बनी रहेंगी।

नई दिल्ली। मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी को अपने अल्फाजों में नई पहचान देने वाले मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का बकरीद के दिन 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने घर पर ही आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शो की लहर छा गई पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वे काफी लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। लंबी बीमारी के कारण हालत ये हो गई थी कि वे अपने करीबियों और परिचितों को पहचान भी नहीं पा रहे थे। बशीर बद्र ने उर्दू साहित्य को नई ऊंचाई दी और यही कारण है कि उनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं। 

When Dr. Bashir Badr, a Padmashree poet of Bhopal wrote his PhD thesis, 87  lions of his own were included in it.

डॉ. बशीर बद्र (असल नाम सय्यद मुहम्मद बशीर) 15 फरवरी 1935 को कानपुर में पैदा हुए। उत्तर प्रदेश में उनका पैतृक स्थान फ़ैज़ाबाद ज़िले का मौज़ा बक़िया है। उनका वास्तविक नाम सैय्यद मोहम्मद बशीर था। उनके पिता सैय्यद मोहम्मद नजीर पुलिस विभाग में कार्यरत थे। प्रारंभिक शिक्षा कानपुर और इटावा में हुई। हाई स्कूल के बाद पिता के निधन के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो गई और उन्हें कम उम्र में ही 85 रुपए मासिक पर पुलिस विभाग में नौकरी करनी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने शिक्षा और साहित्य से अपना संबंध नहीं टूटने दिया।

Urdu poet Bashir Badr received his PHD degree at the age of 85 | अज़ीम शायर बशीर  बद्र को 47 साल बाद मिली PHD की डिग्री

Read More 'कॉकरोच जनता पार्टी' पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर: सीबीआई जांच की मांग; उच्चतम न्यायालय का सुनवाई से इंकार, कहा- इतना भावुकता से न लें

बचपन से ही उन्हें शायरी का शौक था। सातवीं कक्षा में उनकी पहली गजल प्रतिष्ठित पत्रिका ‘निगार’ में प्रकाशित हुई थी। युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उनकी गजलें भारत और पाकिस्तान की साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। बाद में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की उपाधियां प्राप्त कीं। उनका शोध विषय ‘आजादी के बाद उर्दू गजल का आलोचनात्मक अध्ययन’ था।

Read More केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन से जुड़े आवासों पर ईडी की छापेमारी, जानें क्या है मामला?

Padmshri Dr Bashir Badr; A Most Popular Shayer - Amar Ujala Kavya -  पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र:सिर्फ़ शायर ही नहीं एक नज़रिया भी हैं...

Read More 10 सर्कुलर रोड विवाद: राजद बोला- विपक्ष का अपमान कर रही सरकार, नियमों की मनमानी व्याख्या करने का लगाया आरोप

वर्ष 1967 में उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ दी और साहित्य तथा शिक्षण को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 1974 में पीएचडी पूरी करने के बाद वे मेरठ विश्वविद्यालय से संबद्ध मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग में व्याख्याता नियुक्त हुए। वर्ष 1974 से 1990 के बीच उनकी शायरी ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं और वे देश-विदेश के मुशायरों में लोकप्रिय शायर बन गए। डॉ. बशीर बद्र ने उर्दू गजल को पारंपरिक फारसी और अरबी प्रभाव से निकालकर बोलचाल की भाषा से जोड़ा। उन्होंने गजल में ऐसे शब्दों और अनुभवों को शामिल किया, जिन्हें पहले उर्दू शायरी का हिस्सा नहीं माना जाता था। उनकी शायरी में गांव की मिट्टी की खुशबू भी है और शहर की जिंदगी की तल्ख सच्चाइयां भी।

मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, 91 की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा, आखिरी  दिनों में भूल गए थे खुद के शेर - India TV Hindi

उनकी गजलें मोहब्बत, दर्द, अकेलेपन, रिश्तों और बदलते समाज की संवेदनाओं को बेहद सहज ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबां पर हैं। ‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए’ और ‘लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में’ जैसे शेर उन्हें आम जनमानस से जोड़ते हैं।

Bashir Badr no longer recognizes even his wife, Iarshad-Irshad is said when  someone misses a Mushaira.

वर्ष 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जल गया था। इसके बाद वे भोपाल आकर बस गए। उन्होंने बाद में डॉ. राहत सुल्तान से विवाह किया। बढ़ती उम्र के साथ उनकी स्मरण शक्ति कमजोर होती गई और वे लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित थे। डॉ. बशीर बद्र को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया। उनके प्रमुख गजल संग्रहों में ‘इकाई’, ‘इमेज’, ‘आमद’, ‘आस’, ‘आसमान’ और ‘आहट’ शामिल हैं। उर्दू गजल में नए प्रयोगों, सरल भाषा और मानवीय संवेदनाओं के कारण डॉ. बशीर बद्र को आधुनिक उर्दू शायरी का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों को भी लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।

Post Comment

Comment List

Latest News

क्या विपक्ष को फिर एकजुट करेंगी ममता? राहुल से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें ; बढ़ी सियासी हलचल, 6 जून को होगी भविष्य की रणनीति तय क्या विपक्ष को फिर एकजुट करेंगी ममता? राहुल से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें ; बढ़ी सियासी हलचल, 6 जून को होगी भविष्य की रणनीति तय
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद विपक्षी खेमे को एकजुट करने के लिए 6 जून को 'INDIA'...
पूर्व कुलपति डॉ. देव स्वरूप से जुड़े विवादों ने बढ़ाई चर्चा, राजस्थान यूनिवर्सिटी में हलचल
संयुक्त राष्ट्र की खौफनाक रिपोर्ट: 2025 में युद्ध क्षेत्रों में यौन हिंसा के मामले दोगुने से अधिक बढ़े, 10,000 मामले दर्ज
शुभेन्दु सरकार का बड़ा फैसला: सर्वाइकल कैंसर से लड़ने के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान की शुरूआत, 14 वर्षीय लड़कियों को होगा लाभ
अमृत भारत योजना से बदली सूरतगढ़ स्टेशन की तस्वीर, व्यापार और आवागमन को मिला नया बल
सीयूईटी-यूजी 2026 में तकनीकी गड़बड़ी पर 'आप' हमलावर, सौरभ भारद्वाज और आतिशी ने उठाए परीक्षा सुरक्षा पर सवाल
प्रवक्ताओं एवं मीडिया पैनलिस्टों की नियुक्ति छह माह की परिवीक्षा अवधि पर, प्रदर्शन के आधार पर होगा अंतिम चयन : कांग्रेस