ब्रिक्स 2026 : भारत-रूस के बीच एसएमआर, एस-400 में देरी, एआई और रेयर अर्थ पर होगी चर्चा
भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ताओं और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा
नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच नये छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) के संयुक्त रूप से विकास करने और भारत में किसी अन्य स्थान पर कुडनकुलम जैसा दूसरा परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने के मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति में हो रही देरी, उन्नत एसयू-57 लड़ाकू विमानों के संभावित संयुक्त उत्पादन, रुपया-रूबल भुगतान व्यवस्था के विस्तार और रूस के पास मौजूद भारतीय मुद्रा का भारत में निवेश करने के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है।
शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि भारत आर्कटिक महासागर के पास याकूतिया में इंडियन रेयर अथ्र्स लिमिटेड (आईआरईएल) के लिए संभावित खनन अधिकार हासिल करने के साथ-साथ रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन में सहयोग की संभावनाएं भी तलाश सकता है। दूसरी ओर, रूस भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद से उसके पास रुपये के भंडार के एक हिस्से का इस्तेमाल रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त उपक्रमों में करना चाहता है।
रूसी राजनयिकों ने बताया कि चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग के विकास के साथ करीब आठ रूसी बीमा कंपनियां साइबेरिया से कच्चा तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों को बीमा और क्षतिपूर्ति कवर प्रदान कर रही हैं। इनमें रूस की सबसे बड़ी बीमा कंपनी सोगाज के अलावा स्बेर इंश्योरेंस ग्रुप और अल्फास्ट्राखोवानी भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नयी दिल्ली में होने वाली बैठक इस बात को रेखांकित करती है कि दोनों देश अपने संबंधों को कितना महत्व देते हैं। रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा ढांचे के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है और भारत में उसे अब भी ऐतिहासिक रूप से विश्वसनीय और भरोसेमंद मित्र माना जाता है।
रूस के लिए भी भारत केवल रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक और व्यापक एशियाई बाजार के संभावित प्रवेश द्वार के रूप में महत्वपूर्ण है। कुडनकुलम दोनों देशों की परमाणु साझेदारी के केंद्र में बना हुआ है। दोनों देशों ने सैद्धांतिक रूप से भारत में एक दूसरा बड़ा परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने पर सहमति जतायी है, जिसमें छह उच्च क्षमता वाले वीवीईआर-1200 या वीवीईआर-टीओआई रिएक्टर लगाए जाएंगे। प्रत्येक रिएक्टर करीब 1,200 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगा और संयंत्र के पूरा होने पर इसकी कुल क्षमता 7,200 मेगावाट होगी।
एक अधिकारी ने कहा, इस संबंध में तकनीकी अध्ययन चल रहे हैं और मोदी-पुतिन बैठक के बाद इनमें तेजी आ सकती है। दोनों देशों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और तैरती परमाणु ऊर्जा इकाइयों पर भी शुरुआती काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि रूस ने भारत को अपनी कुछ सबसे उन्नत सैन्य तकनीकों तक पहुंच देने की इच्छा के संकेत दिये हैं, जिसमें पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57 लड़ाकू विमान के संयुक्त उत्पादन में संभावित सहयोग भी शामिल है।
राजनयिकों ने कहा, इस तरह के प्रस्तावों का उद्देश्य न केवल लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को बनाए रखना है, बल्कि यह भी दिखाना है कि पश्चिमी दबाव ने रूस की रणनीतिक प्रासंगिकता को समाप्त नहीं किया है। भारत एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति में हुई देरी का मुद्दा भी उठायेगा। उन्होंने बताया कि रूसी राजनयिकों ने भारत को आश्वासन दिया है कि भारत की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर दोनों देश उत्तरी समुद्री मार्ग और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे के आसपास सहयोग विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत और रूस महत्वपूर्ण खनिजों, जिनमें लिथियम और रेयर अर्थ तत्व शामिल हैं, की खोज, प्रसंस्करण और तकनीकी सहयोग के मुद्दे पर भी व्यापक रूप से समान सोच रखते हैं।
अधिकारियों ने कहा, रूस भारत की सरकारी खनन कंपनी आईआरईएल को याकूतिया स्थित टॉमटोर रेयर अर्थ भंडार तक पहुंच देने पर भी विचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक विश्लेषण के लिए नमूनों का आदान-प्रदान पहले ही किया जा चुका है।यदि खनन अभियान शुरू होता है तो यह सहयोग आगे चलकर रेयर अर्थ मैग्नेट के संयुक्त उत्पादन और रेयर अर्थ सामग्री के पुनर्चक्रण तक बढ़ सकता है। दोनों पक्ष प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मॉडल तथा टूलकिट विकसित करने में गहरे सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। स्बेर जैसी रूसी कंपनियां एआई और साइबर सुरक्षा को द्विपक्षीय संबंधों में विकास के नये क्षेत्रों के रूप में आगे बढ़ा रही हैं तथा संयुक्त अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और संप्रभु आईटी प्लेटफॉर्म की स्थापना की मांग कर रही हैं, जिसमें ब्रिक्स साइबर सुरक्षा गठबंधन के माध्यम से सहयोग भी शामिल है।
भारतीय राजनयिकों ने कहा कि यूक्रेन का युद्ध मोदी-पुतिन (एजेंसी) का अनिवार्य हिस्सा बना रहेगा। इसके साथ ही ईरान से जुड़े संघर्ष और व्यापक फारस की खाड़ी की स्थिति पर भी चर्चा होगी। भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा एक बड़ा भू-राजनीतिक मुद्दा है। लंबे समय तक इसके बाधित रहने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, महंगाई बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। रूस खुद एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक होने के बावजूद वैश्विक ऊर्जा बाजारों के सुचारू रूप से काम करने और जलडमरूमध्य से होकर होने वाले वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन को हमलों या दबाव से मुक्त रखने में गहरी रुचि रखता है।

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