टीएमसी का केंद्र पर तीखा हमला: भाजपा संसद में ज़बरदस्ती करा रही है बिल पास, डेरेक ओ'ब्रायन ने लगाया महत्वपूर्ण कानूनों को जल्दबाज़ी में पास कराने का आरोप 

सदनों के कामकाज में बार-बार हो रही रुकावटों पर भी उठाए सवाल

टीएमसी का केंद्र पर तीखा हमला: भाजपा संसद में ज़बरदस्ती करा रही है बिल पास, डेरेक ओ'ब्रायन ने लगाया महत्वपूर्ण कानूनों को जल्दबाज़ी में पास कराने का आरोप 
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने केंद्र सरकार पर संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के एफसीआरए जैसे कठोर कानून जबरन पास कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन के लगातार बाधित होने से लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर होती है, जिससे सरकार विधायी जांच से बच निकलती है।

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सरकार पर "कठोर" कानून लाने और बिना पर्याप्त चर्चा के संसद में ऐसे बिलों को ज़बरदस्ती पास कराने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने दोनों सदनों के कामकाज में बार-बार हो रही रुकावटों पर भी सवाल उठाए। ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी ने संसद में विवादास्पद कानून लाने और बिना सार्थक बहस के उन्हें पास कराने का तरीका अपना लिया है।

तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा, "भाजपा का तरीका: एफसीआरए जैसे कठोर बिल लाना और फिर बिना किसी बहस के संसद में उन्हें ज़बरदस्ती पास करा लेना।" वरिष्ठ सांसद ने यह भी तर्क दिया कि संसद में लंबे समय तक कामकाज में रुकावट से अंततः लोकतांत्रिक जवाबदेही कमज़ोर होती है, क्योंकि इससे कार्यपालिका (सरकार) की विधायी जांच सीमित हो जाती है। ओ'ब्रायन ने 'एक्स' पर लिखा, "जब संसद काम नहीं करती, तो किसे फ़ायदा होता है? सत्ता में सरकार, सरकार संसद के प्रति जवाबदेह, संसद जनता के प्रति जवाबदेह। जब संसद नहीं चलती, तो सरकार किसी के प्रति जवाबदेह नहीं रहती।"

खबरों के अनुसार, सरकार अगले हफ़्ते लोकसभा में 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक' (एफसीआरए) पेश कर सकती है। ये टिप्पणियां संसद के चल रहे मॉनसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच आई हैं, जहां बार-बार सदन स्थगित होने और विरोध-प्रदर्शनों के कारण कई मौकों पर विधायी कामकाज बाधित हुआ है। विपक्षी दलों ने बार-बार सरकार पर विवादास्पद मुद्दों पर विस्तृत चर्चा से बचने और संसद में महत्वपूर्ण कानूनों को जल्दबाज़ी में पास कराने का आरोप लगाया है; केंद्र सरकार ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है।

ओ'ब्रायन ने अपनी पोस्ट में जिस विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) का ज़िक्र किया है, वह एक विवादास्पद कानून रहा है। विपक्षी दलों और कई नागरिक समाज संगठनों का आरोप है कि इसके प्रावधानों का इस्तेमाल गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के कामकाज को सीमित करने के लिए किया गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ओ'ब्रायन की ताज़ा टिप्पणियां संसदीय कार्यवाही के संचालन को लेकर सरकार के प्रति विपक्ष की आलोचना को और बढ़ाती हैं। कई विपक्षी नेताओं ने कानूनों के पारित होने से पहले उन पर अधिक बहस और जांच-परख की मांग की है। सरकार ने कहा है कि वह विधायी कामकाज करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने विपक्षी दलों पर बार-बार विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी करके संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

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