विकासशील देशों की एकजुटता जरूरी, जयशंकर बोले- वैश्विक फैसलों में मिले उचित प्रतिनिधित्व और मजबूत भागीदारी
वैश्विक संकटों और बहुपक्षवाद सुधार पर डॉ. एस. जयशंकर के 5 प्रमुख सुझाव
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि विकासशील देश वैश्विक संकटों का सबसे अधिक सामना कर रहे हैं लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में वे सबसे पीछे हैं। जयशंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर "समान विचार वाले विकासशील देशों और मित्र देशों की उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक" को संबोधित करते कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए विकासशील देशों की एकजुटता बेहद जरूरी है।
उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला, वित्त और कनेक्टिविटी में रुकावटों को स्वीकार न करने, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पैदा होने वाली नई असमानताओं को रोकने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर फैसला लेने वाली संस्थाओं का हिस्सा होना चाहिए। जयशंकर ने विकासशील देश के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने, एआई के स्वदेशी टूल और फ्रेमवर्क साझा करने तथा इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मंचों के जरिए जलवायु कार्रवाई आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद में सुधार को भी जरूरी बताया। उन्होंने पांच सुझाव भी दिए। पहला मौजूदा मंचों का उपयोग करके विकासशील देशों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाना चाहिए, ताकि उन्हें नजरअंदाज न किया जाए।
दूसरा वैश्विक संकटों के प्रभाव से बचाव के लिए विकासशील देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना जरूरी है। तीसरा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में विकासशील देशों के लिए अपने बनाए उपकरण और तकनीक साझा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एआई मानव-केंद्रित रहे। चौथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केवल ग्लोबल नॉर्थ पर निर्भर रहने के बजाय अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसे मंचों के माध्यम से अधिक काम करना चाहिए और पांचवां विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और पूरी बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

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