आस्था पर पूरा ‘ट्रस्ट’ : प्रदेश में बड़े मंदिरों में ‘दान’ में आई पाई-पाई का हिसाब, सभी कराते हैं आय-व्यय की ऑडिट
मंदिर से होने वाली प्राप्तियों को करते हैं समाजोपयागी कार्यों में खर्च
जयपुर। जहां एक ओर अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी की देशभर में चर्चा है। एसआईटी इसकी जांच भी कर रही है। ऐसे में राजस्थान के बड़े मंदिरों में चंदे में आई राशि और अन्य वस्तुओं का पूरा हिसाब रखा जाता है। बात करें चित्तौड़ के सावंरिया सेठ के मंदिर की तो वहां आने वाली भेंट की सार्वजनिक रूप से गिनती की जाती हैं और बाद में मंदिर प्रशासन उसकी मीडिया में विज्ञप्ति भी जारी कराता है। राज्य के बड़े मंदिरों में होने वाली आमद को बैंकों में जमा कराने के साथ ही ऑडिट कराई जाती है, जो पब्लिक डॉमेन में होती हैं। बैलेंस सीट में मंदिर को प्राप्त होने वाली प्राप्तियां और खर्चों का साफ तौर पर उल्लेख होता है। मंदिर के खर्चे और समाजोपयोगी कार्य के बाद बचने वाले धन को बैंकों में जमा करा दिया जाता हैं।
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर :
8 करोड़ 40 लाख रुपए की हुई आय- मंदिर को 2025-26 में 8 करोड़, 40 लाख रुपए की आमद हुई। आठ करोड़, 30 लाख रुपए मंदिर व्यवस्था, समाजोपयोगी कार्य में लगाए गए। रामदेव नेत्र महाकुम्भ में 11 लाख का सहयोग, वरिष्ठ नागरिकों को च्यवनप्राश वितरण सहित अन्य कार्यों पर राशि खर्च की गई। आमद में से बचे दस लाख रुपए बैंक में जमा कराए गए। मंदिर का लेनदेन किन बैंकों में किया गया, इसका उल्लेख भी किया गया।
सांवरिया सेठ :
337.67 करोड़ रुपए की हुई प्राप्ति- चित्तौड़गढ़ में भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर। 2025-26 में करीब 337.67 करोड़ की प्राप्ति। जबकि वर्ष 1992-93 में 1.76 करोड़ रुपए की आमद हुई थी। यदि वर्ष 1992-93 और वर्ष 2025-26 की आमद की तुलना की जाए तो करीब 43.10 प्रतिशत अधिक हैं।
गोविन्द देवजी मंदिर :
7 करोड़ आमद, 6 करोड़ 80 लाख खर्च- जयपुर के आराध्य देव भगवान गोविन्द देवजी मंदिर में 2024-25 में मंदिर को प्रसादी और भेंट के रूप में 6 करोड़, 37 लाख, किराए से 9 लाख 10 हजार, बैंकों में रखे धन से 1 करोड़, 21 लाख ब्याज और एक गाड़ी बेचने पर दस लाख रुपए की प्राप्ति हुई। खर्चें के बाद करीब एक करोड़ रुपए बैंक में जमा कराया गए।
श्रीनाथ जी मंदिर :
प्रति माह करीब एक करोड़ रुपए की प्राप्ति- नाथद्वारा के श्रीनाथ जी मंदिर में प्रति माह करीब एक करोड़ प्राप्ति और 50 लाख रुपए के आस-पास ब्याज मिलता हैं। राशि का उपयोग मंदिर के रख-रखाव,धर्मशाला निर्माण सहित अन्य धार्मिक कार्यों पर खर्च किए जाते हैं।

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