इथेनॉल फैक्ट्री आंदोलन मामला : आंदोलन में बाहरी लोगो ने आकर माहौल बिगाड़ा, फैक्ट्री को पूर्व सरकार ने ही दी थी मंजूरी

100 से अधिक असामाजिक तत्वों ने वहां माहौल खराब किया

इथेनॉल फैक्ट्री आंदोलन मामला : आंदोलन में बाहरी लोगो ने आकर माहौल बिगाड़ा, फैक्ट्री को पूर्व सरकार ने ही दी थी मंजूरी

हनुमानगढ़ के टिब्बी में इथेनॉल फैक्ट्री को बंद करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर खाद्य मंत्री सुमित गोदारा और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने मीडिया से बातचीत की। सुमित गोदारा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2022 में यह फैसला किया गया। 2023 में एनओसी प्रदूषण मंडल से जारी की गई। तब कांग्रेस ने कहा था कि किसानों को फायदा होगा।

जयपुर। हनुमानगढ़ के टिब्बी में इथेनॉल फैक्ट्री को बंद करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर खाद्य मंत्री सुमित गोदारा और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने मीडिया से बातचीत की। सुमित गोदारा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2022 में यह फैसला किया गया। 2023 में एनओसी प्रदूषण मंडल से जारी की गई। तब कांग्रेस ने कहा था कि किसानों को फायदा होगा। करीब 100 से अधिक असामाजिक तत्वों ने वहां माहौल खराब किया। बाहर के राज्यों से लोग आए। वहां किसानों के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। सीएम खुद गर्मी में गए और उनके कल्याण के कई काम किए। 40 फीसदी गेहूं सबसे ज्यादा हनुमानगढ़ में किसानों से सरकार ने खरीदा। कांग्रेस के विधायक और एमपी भी थे। आपकी सरकार ने ही इसको शुरू करवाया। इससे ना केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, धान की खेती का उपयोग फैक्ट्री में होगा। गुमराह किया जा रहा है कि पानी अनावश्यक उपयोग होगा, जबकि वहां ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा ताकि एक ही पानी का बार उपयोग होगा।

माहौल खराब करने वाले लोगों पर सख्त कारवाई होगी। राज्य और केंद्र सरकार किसानों के हितों में काम कर रहे हैं। कंपनी वहां रोजगार दे रही है,  बाहर से आ कर लोग माहोल खराब करेंगे तो सख्त कारवाई होगी। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि  कांग्रेस की दोहरी नीति है। पूर्व सरकार के वक्त काम शुरू हुआ। अब विरोध कर रहे है। फैक्ट्री में समझौता के अनुसार काम करेंगी। वार्ता का तैयार है। माहौल खराब करेंगे तो कारवाई होगी। कानून को हाथ में लेंगे तो लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने का काम सरकार करेगी। किसानों के हित में किए जा रहे कामों को गिनाते हुए कहा कि सीएम खुड काश्तकार रहे, किसानों के दर्द को जानते हैं। यह प्रायोजित आंदोलन है। सरकार से बात करे, जो कानून सम्मत मांग होगी वह मानी जाएगी। आंदोलन के पीछे दूषित उद्देश्य है। सरकार के दो साल होने जा रहे है, इसलिए जानबूझकर यह टाइम चुना गया है।

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