अलवर से भरतपुर तक ग्रैप की पहली सख्ती, 5 से 20 नवंबर को और कड़ा पहरा, क्या है ग्रैप, जो हवा बिगड़ते ही हरकत में आता है ?
दिल्ली-एनसीआर की सख्ती का असर राजस्थान की देहरी तक
जयपुर। अक्टूबर की ढलती शामों में पूर्वी राजस्थान के कुछ जिलों की छतों से दूर की पहाड़ियां धुंधली नजर आने लगी हैं। सुबह की सैर पर निकले लोग हवा में हल्का भारीपन बताते हैं। यह भारीपन अब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और राजस्थान के पांच एनसीआर क्षेत्रों में पाबंदियां शुरू हो चुकी हैं। ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का पहला चरण 21 अक्टूबर 2026 को लागू हुआ, जब एनसीआर की हवा खराब श्रेणी में पहुंची। यह आज भी जारी है। सीएक्यूएम की निगरानी में चलने वाली इस योजना में हवा जितनी बिगड़ती है, पाबंदियां उतनी बढ़ती हैं। अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिले की बहरोड़ तहसील इसके दायरे में हैं। संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई, निगरानी और समीक्षा के निर्देश हैं। पहले चरण का जोर निर्माण स्थलों की धूल, सड़कों की सफाई, पीयूसी जांच और डीजी सेट पर शुरुआती रोक पर है।
दिल्ली-एनसीआर की सख्ती का असर राजस्थान की देहरी तक
सीएक्यूएम ने 5 से 20 नवंबर के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इसका आधार 2018 से 2025 के नवंबर के आंकड़े हैं, जिनमें शुरुआती और मध्य नवंबर में कई दिन हवा सीवियर और सीवियर प्लस तक पहुंची। इस दौरान पूरे एनसीआर में धूल उड़ाने वाले तोड़फोड़ और खुले निर्माण पर रोक रहेगी, जिसमें हाईवे, सड़क और बिजली लाइन जैसी रैखिक परियोजनाएं भी शामिल हैं। रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अस्पताल, जलापूर्ति-सीवरेज और राष्टÑीय सुरक्षा से जुड़े कामों को छूट है।
औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में कारखानों और भारी वाहनों की रोज आवाजाही है, इसलिए यहां नियम लागू कराना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। सर्दी में हवा की रफ्तार घटती है और प्रदूषक जमीन के पास ठहर जाते हैं। सबसे ज्यादा जोखिम बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों को रहता है। असली लड़ाई आदेशों से ज्यादा आदतों की है। पीयूसी समय पर बनवाएं, मलबा और कचरा खुले में न छोड़ें, पत्ते-पराली न जलाएं और छोटी दूरी के लिए साझा साधन चुनें।
क्या है ग्रैप, जो हवा बिगड़ते ही हरकत में आता है
ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान, यानी प्रदूषण के स्तर के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से लागू होने वाली कार्ययोजना। इसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) लागू करता है और उसी की निगरानी में चलाया जाता है। इसे ऐसे समझिए कि जैसे-जैसे हवा बिगड़ती है, पाबंदियों की सीढ़ी भी एक-एक पायदान ऊपर चढ़ती है। जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 201 से 300 के बीच यानी खराब श्रेणी में पहुंचता है, तब पहला चरण लागू होता है। मकसद साफ है- हालात और बिगड़ने से पहले ही उन्हें थाम लेना।
इनका कहना है...
ग्रैप के पहले चरण की पालना संबंधित जिलों में की जा रही है। आयोग द्वारा जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जाएगी और आगे आने वाले आदेशों की भी पालना सुनिश्चित होगी।
कपिल चंद्रवाल (सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल)

Comment List