पिंक सिटी की पहचान बचाने की हाईकोर्ट ने मांगी कार्य योजना, अवैध निर्माणों का सर्वे कर दो सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश
सोशल ऑडिट जैसी व्यवस्था पर विचार भी करने के लिए कहा
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पिंक सिटी की वैश्विक पहचान व ‘यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी’ का दर्जा बचाने के मुद्दे पर गंभीरता जताते हुए राज्य सरकार सहित अन्य संबधित विभागों व अफसरों से इसकी कार्य योजना देने के लिए कहा है। अदालत ने परकोटे में हो रहे अवैध व अनियमित निर्माण, अतिक्रमण और ऐतिहासिक भवनों में बदलाव को लेकर संबंधित अफसरों से जवाब देने के लिए कहा है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने यह आदेश परकोटा संरक्षण से जुडी मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए दिए। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि दिसंबर, 2026 से पहले पर्याप्त एवं प्रभावी सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए तो जयपुर के चारदीवारी वाले शहर के यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के तौर पर अपनी मान्यता खोने का गंभीर जोखिम है। ऐसे में अदालत ने जेडीए तथा जयपुर के नगर निगमों को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जयपुर के चारदीवारी वाले शहर को नुकसान पहुंचाने वाले अनधिकृत एवं अनियमित निर्माणों का सर्वेक्षण करने तथा उसकी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, चार सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि हेरिटेज नियमों का पालन कैसे हो रहा है।
निर्माण अनुमतियों से पहले हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट हुआ या नहीं और पिछले पांच वर्षों में अवैध निर्माण के खिलाफ क्या कार्रवाई की। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल और दीर्घकालीन चरणबद्ध एक्शन प्लान मांगा है और सोशल ऑडिट जैसी व्यवस्था पर विचार भी करने के लिए कहा है। अदालत ने इस मामले में सहयोग करने के लिए अधिवक्ता संदीप पाठक, युवराज सामंत, मधुसूदन सिंह राजपुरोहित और अनिरुद्ध माथुर को न्यायमित्र नियुक्त किया है।

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