कार्तिक मास शुरू : इस माह धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज त्योहार आएंगे
इस मास में दीपदान से मिलता है अक्षय पुण्य
जयपुर। पवित्र कार्तिक मास शुरू हो गया है, कार्तिक मास में धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, छठ पूजा और देवउठनी एकादशी सहित कई प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, दीपदान, स्नान और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व का माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, सूर्यदेव और कार्तिकेय स्वामी की पूजा के साथ तुलसी और आंवले के पौधे की पूजा का विशेष महत्व है। गुलाबी नगरी में गलता स्नान और मंदिरों में पूजा करने वाली महिलाओं की संख्या काफी अधिक रही। ज्योतिषाचार्य डॉ.अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक माह काफी पवित्र और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
दीपदान और स्नान का विशेष महत्व- कार्तिक मास में मंदिरों, तुलसी के पौधे, आंवले के वृक्ष और जलाशयों के किनारे दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में किया गया दीपदान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने और सूर्यदेव को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व है। पवित्र नदियों में स्नान संभव नहीं होने पर घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इस महीने में भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा और तुलसी-आंवले के पूजन से सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की कामना की जाती है।
संयम, जप और ध्यान का महीना- कार्तिक मास में नियमित दिनचर्या, संयमित खान-पान, जप और ध्यान को महत्व दिया गया है। सुबह जल्दी उठकर पूजा-पाठ करना, मन को शांत रखना और विवादों से बचना आध्यात्मिक साधना का हिस्सा है। बदलते मौसम में गर्म कपड़े पहनने, संतुलित आहार लेने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है। उन्होंने जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, कंबल और धन का दान करने की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा और परोपकार इस माह के प्रमुख संदेश हैं।
कार्तिक मास के प्रमुख पर्व- कार्तिक मास में 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, 5 को रमा एकादशी, 6 धनतेरस, 7 नरक चतुर्दशी, 8 दीपावली, 10 गोवर्धन पूजा, 11 भाई दूज, 13 से 16 तक छठ पूजा, 17 को गोपाष्टमी, 18 अक्षय नवमी, 20 देवउठनी एकादशी, 21 तुलसी विवाह और 23 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाएगी।

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