लक्ष्मी पूजन की परंपरा ने बदली खेती की तस्वीर, रोजदा के खेतों में लहलहा रहा गन्ना
किसानों ने अपनाया खेती का नया प्रयोग
जयपुर। दीपावली का त्योहार आते ही घरों में लक्ष्मी पूजन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पूजा की थाली में फूल, फल, मिठाई के साथ गन्ने का भी विशेष महत्व है। इसी धार्मिक परंपरा ने अब जयपुर के ग्रामीण इलाकों में खेती का नया अवसर पैदा कर दिया है। रोजदा और सरना गांवों के आस-पास अब खेतों में गन्ने की फ सल लहलहाने लगी है। खास बात यह है कि यहां किसान पूरे साल गन्ने की व्यावसायिक खेती के बजाय दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखकर इसकी पैदावार कर रहे हैं। त्योहार पर गन्ने की बढ़ती मांग किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन रही है।
खेती में नवाचार की ओर बढ़ते कदम :
रोजदा और सरना सहित अन्य गांवों में गन्ने की खेती ग्रामीण क्षेत्र में बदलते कृषि प्रयोग की तस्वीर पेश कर रही है। यह पहल बताती है कि किसान स्थानीय मांग और परंपराओं को समझकर खेती के नए रास्ते तलाश रहे हैं। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में इस्तेमाल होने वाला गन्ना अब केवल पूजा सामग्री नहीं, ग्रामीण किसानों की उम्मीद और मेहनत का भी प्रतीक बनता जा रहा है।
परंपरा से खेतों तक पहुंची गन्ने की मिठास :
प्रदेश के कई जिलों में गन्ने की खेती परंपरागत रूप से होती रही है, लेकिन अब जयपुर के ग्रामीण किसान भी इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
चित्तौड़गढ़ से बीज लाकर शुरू की खेती :
रोजदा निवासी किसान भोमराज प्रजापत ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ जमीन में चित्तौड़गढ़ से गन्ने का बीज लाकर बुवाई की थी। अब फ सल तैयार होने पर वे इसे बाजार में बेचते हैं। गन्ने का एक जोड़ा 25 रुपए में बेचा जाता है। दीपावली से पांच-सात दिन पहले बिक्री शुरू कर देते हैं जो त्योहार तक चलती है। डाला छठ पर्व में भी गन्ने की खासी डिमांड रहती है।
सीजन की मांग पर टिकी किसानों की उम्मीदें :
गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए दीपावली सबसे अहम समय होता है। इस दौरान लोग पूजा के लिए गन्ने की खरीदारी करते हैं। स्थानीय स्तर पर ही फ सल बेचने का अवसर मिलने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सहूलियत होती है।

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