राजस्थान को देश का माइनिंग हब बनाने में प्रवासी राजस्थानियों की प्रमुख भूमिका, निवेश और सहभागिता में सक्रिय भागीदारी

औद्योगिक प्रतिष्ठानों के विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता तय

राजस्थान को देश का माइनिंग हब बनाने में प्रवासी राजस्थानियों की प्रमुख भूमिका, निवेश और सहभागिता में सक्रिय भागीदारी

राजस्थान को देश का माइनिंग हब बनाने में प्रवासी राजस्थानियों की प्रमुख भूमिका भी तय की जाएगी। इसके साथ ही क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन, खनन और प्रसंस्करण में खनिज क्षेत्र के जाने माने विशेषज्ञों, उद्यमियों, एकेडेमेशियन्स और सरकार के बीच सकारात्मक सहभागिता होगी। खान, भूविज्ञान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकान्त ने बताया कि 10 दिसंबर को आयोजित प्रवासी राजस्थानी दिवस में माइनिंग सेक्टर के सेक्टोरल सेशन को उपयोगी और बहुआयामी बनाया गया है।

जयपुर। राजस्थान को देश का माइनिंग हब बनाने में प्रवासी राजस्थानियों (एनआरआर) की प्रमुख भूमिका भी तय की जाएगी। इसके साथ ही क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन, खनन और प्रसंस्करण में खनिज क्षेत्र के जाने माने विशेषज्ञों, उद्यमियों, एकेडेमेशियन्स और सरकार के बीच सकारात्मक सहभागिता होगी। खान, भूविज्ञान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकान्त ने बताया कि 10 दिसंबर को आयोजित प्रवासी राजस्थानी दिवस में माइनिंग सेक्टर के सेक्टोरल सेशन को उपयोगी और बहुआयामी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सेक्टोरल सेशन के दौरान प्रवासी राजस्थानियों, राज्य के विशेषज्ञों के साथ ही देश के नामी गिरामी विशेषज्ञों की सहभागिता तय की गई है ताकि प्रवासी राजस्थानियों की राजस्थान के खनन क्षेत्र में निवेश और सहभागिता में सक्रिय भागीदारी हो सके। 

प्रमुख सचिव माइंस टी. रविकान्त ने बताया कि खनिज संपदा और क्रिटिकल व स्ट्रेटेजिक खनिजों की उपलब्धता में राजस्थान देश-दुनिया के खनिज मानचित्र में प्रमुख स्थान रखता है। ऐसे में प्रवासी राजस्थानियों को राजस्थान के माइनिंग क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया जाना आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए 10 दिसंबर के प्रवासी राजस्थानी दिवस पर माइनिंग सेक्टर का अलग से एक सत्र रखा गया है। इसमें प्रवासी राजस्थानियों के सामने राजस्थान की खनिज संपदा और बेहतर संभावनाओं की तस्वीर रखी जाएगी ताकि अधिक से अधिक प्रवासी राजस्थानी राजस्थान की धरती से जुड़कर निवेश, रोजगार और प्रदेश के आर्थिक विकास में भागीदार बन सकें। आत्म निर्भर भारत के लिए राजस्थान की क्रिटिकल मिनरल संभावनाओं की अनलॉकिंग पर आयोजित इस सत्र को उपादेय और बहुआयामी बनाने के लिए प्रवासी राजस्थानियों के साथ ही हैदराबाद, ओडिशा, धनबाद सहित अन्य विशेषज्ञ, भारतीय भू सर्वेक्षण विभाग, ऑयल इंडिया, एटोमिक मिनरल डिविजन के विशेषज्ञ व औद्योगिक प्रतिष्ठानों के विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता तय की गई है। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री जो स्वयं खान मंत्री भी है,मिनरल एक्सप्लोरेशन से लेकर माइनिंग क्षेत्र की सभी गतिविधियों में राजस्थान को अग्रणी प्रदेश बनाने के लिए कृतसंकल्प है। इसी का परिणाम है कि प्रवासी राजस्थानी दिवस पर माइनिंग का अलग से सेक्टोरल सेशन रखते हुए प्रवासी राजस्थानियों, उद्यमियों, विशेषज्ञों, एकेडेमिशियन्स की प्रतिभागिता तय की गई है। रविकान्त ने बताया कि केन्द्र सरकार के क्रिटिकल मिनरल मिशन का राजस्थान प्रमुख हिस्सेदार प्रदेश है। राजस्थान में रेयर अर्थ एलिमेंट, लिथियम, टंगस्टन, नायोबियम, टिन, जिरकोनियम, रुबिडियम, ग्रेफाइट एवं फास्फोराइट आदि मिनरल्स के डिपोजिट्स अच्छी मात्रा में है। बाड़मेर के सिवाणा रिंग, जालौर व नागौर में दुर्लभ व आज के समय में महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलमेंट आरईई के भण्डार मिले हैं। पोटाश के हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर बेल्ट में डिपोजिट्स मिले है। नागौर में टंगस्टन के भण्डार है। बांसवाड़ा, उदयपुर व दौसा जिलों में सोने के भण्डार के संकेत है तो दुर्लभतम खनिज यूरेनियम के खनन के लिए सीकर के खण्डेला के पास रोहिल में यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया इंडिया द्वारा यूरेनियम पर काम भी शुरु कर दिया गया है। प्रमुख सचिव  टी. रविकान्त ने बताया कि माइंस के सेक्टोरल सेशन में 7 विषयों पर विशेषज्ञ टिप्पणियों के साथ ही खुली चर्चा भी होगी जिससे प्रवासी राजस्थानी, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच जिज्ञासाओं व अनुभवों को भी साझा किया जा सकेगा।

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