मां अन्नपूर्णा भंडारा सेवा की नवीं वर्षगांठ, दस लोगों से शुरू हुई अन्नसेवा अब तक हजारों जरूरतमंदों तक पहुंची
अपने घरों से रोटी-सब्जी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन कराने का लिया था संकल्प
जयपुर। किसी जरूरतमंद की थाली न रहे खाली और भूख से परेशान व्यक्ति को सम्मान के साथ भोजन मिल सके, इसी संकल्प के साथ शुरू हुई हरिओम जन सेवा समिति की मां अन्नपूर्णा भंडारा सेवा ने रविवार को अपनी स्थापना की नवीं वर्षगांठ मनाई। महज 10 लोगों से शुरू हुई अन्नसेवा से अब तक हजारों जरूरतमंदों ने भरपेट भोजन किया है।
सेवा के नौ वर्ष पूरे होने पर रविवार को सीकर रोड स्थित वीकेआईए रोड स्थित शिव मंदिर में भंड़ारा एवं भजन उत्सव आयोजित हुआ। समिति अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि नौ वर्ष पहले कुछ सेवाभावी लोगों ने अपने घरों से रोटी-सब्जी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन कराने का संकल्प लिया था। शुरुआत में करीब 10 किलो आटे से भोजन तैयार होता था। धीरे-धीरे समाज के लोगों का सहयोग बढ़ा और यह छोटी-सी पहल नियमित अन्नसेवा में बदल गई। आज रोजाना 500 से 600 लोगों को भोजन कराया जाता है। पिछले वर्षों में लाखों जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाया जा चुका है।
बुजुर्गों और दिव्यांगों को घर के लिए भी भोजन :
भंडारे में कई ऐसे बुजुर्ग और दिव्यांग लोग भी आते हैं, जिनके परिवार की ओर से उनकी भोजन व्यवस्था नहीं हो पाती। समिति के सदस्य भोजन कराते हैं तथा उनके लिए शाम का भोजन भी पैक करके देते हैं। कोरोना महामारी के दौरान हरिओम जन सेवा समिति ने बड़ी संख्या में लोगों को भोजन पहुंचाया। समिति का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में भी अन्नसेवा को बंद नहीं किया गया। भंडारे की एक विशेष व्यवस्था यह है कि समिति के किसी सदस्य ने नौ वर्षों में प्रसादी को चखने तक से परहेज किया ताकि भोजन अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
सुबह चार बजे से शुरू हो जाती है रसोई :
मां अन्नपूर्णा भंडारे की रसोई सुबह करीब चार बजे से शुरू हो जाती है। समिति के सदस्य और स्वयंसेवक आटा गूंथने, सब्जियां काटने और भोजन तैयार करने में जुट जाते हैं। सुबह नौ बजे से जरूरतमंदों को भोजन प्रसादी वितरित की जाती है। यहां पूड़ी, सब्जी, रोटी, खीर, जलेबी, देसी घी का हलवा और फल आदि उपलब्ध कराए जाते हैं।
कैसे चलता है भंड़ारा :
भंडारा नो प्रॉफिट नो लॉस की भावना से संचालित किया जा रहा है। कोई व्यक्ति जन्मदिन, विवाह की सालगिरह या पुण्यतिथि पर अन्नसेवा कराता है तो कई लोग आटा, सब्जी, दूध, घी और अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं। सेवा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक भी समय देते हैं। समिति के अनुसार, प्रतिदिन करीब 60 किलो आटा, 25 किलो सब्जी, 40 किलो दूध, 10 किलो सूजी, 15 किलो तेल, 20 किलो चीनी, 20 किलो बेसन, 5 किलो घी सहित अन्य सामग्री का उपयोग होता है। नौवीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवी पुरुषोत्तम बंसल, सब इंस्पेक्टर वसुंधरा चौहान और भाजपा मंडल अध्यक्ष जयंत कुमावत सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।

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