राजस्थान की सड़कों पर अब रफ्तार का नया दौर, हाईवे बनेंगे हाई-स्पीड कॉरिडोर
भविष्य का ट्रैफिक, आज की प्लानिंग
जयपुर। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक्सप्रेस-वे से अलग उच्च गति वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए पहली बार व्यापक डिजाइन व्यवस्था तय की है। ट्रैफिक के हिसाब से 60 से 70 मीटर तक चौड़ाई, नियंत्रित प्रवेश, इंटरचेंज, सर्विस रोड और सुरक्षा इंतजाम इस नई व्यवस्था का हिस्सा होंगे। राजस्थान में भविष्य की सड़क अब आज के ट्रैफिक को देखकर नहीं, आने वाले वर्षों के ट्रैफिक लोड को ध्यान में रखकर डिजाइन होगी। एनएचएआई के नए दिशा-निर्देश आगामी 4/6 लेन वाले सभी ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड उच्च गति वाले नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे।
10,790 किमी एनएच का नेटवर्क, अब रफ्तार बढ़ाने की तैयारी :
राजस्थान देश के सबसे बड़े राज्यों में है और दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्ग यहां से गुजरते हैं। राजस्थान में 20 प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग हैं और राज्य का दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर 58 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है।
60-70 मीटर की सड़क क्यों जरूरी...?
नई गाइडलाइन में हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्ग की चौड़ाई को यातायात के अनुमान से जोड़ दिया गया है। 15 हजार तक वाहनों पर चार लेन वाले कॉरिडोर के लिए 60 मीटर चौड़ाई। 15 से 25 हजार वाहनों पर चार लेन-छह लेन संरचना के लिए 70 मीटर चौड़ाई। 25 से 40 हजार वाहनों पर छह लेन कॉरिडोर के लिए 70 मीटर चौड़ाई।
1340 किमी हाई-स्पीड कॉरिडोर की तस्वीर :
जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं की कुल 1,340 किमी लंबाई अवार्ड हो चुकी थी। इसमें 1,192 किमी पूरा और 148 किमी निर्माणाधीन था। यानी नई गाइडलाइन भविष्य की बात भर नहीं है। राजस्थान में हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा पहले ही जमीन पर आ चुका है और आने वाले प्रोजेक्ट इसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।
राजस्थान में आवारा पशु भी बड़ी चुनौती :
नई गाइडलाइन में हाई-स्पीड कॉरिडोर के बाहरी किनारे पर एक मीटर ऊंची चारदीवारी का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद अतिक्रमण, अनधिकृत प्रवेश और आवारा पशुओं को हाईवे पर आने से रोकना है। राजस्थान के संदर्भ में यह प्रावधान सीधे सड़क सुरक्षा से जुड़ता है। 100 किमी से अधिक रफ्तार वाले मार्ग पर अचानक सड़क पर आया पशु चालक को संभलने का मौका बहुत कम देता है।
आम आदमी पर सीधा असर :
लंबी दूरी की यात्रा तेज और अधिक निर्बाध होगी। माल पहुंचाने का समय घटेगा और अनाधिकृत प्रवेश और आवारा पशुओं पर नियंत्रण मजबूत होगा। सीधे हाईवे प्रवेश की सुविधा कम होगी, इंटरचेंज-अंडरपास पर निर्भरता बढ़ेगी। किसानों के लिए खेतों तक पहुंच बनाए रखना जरूरी होगा। खेत हाईवे के दोनों तरफ बंट गए, तो किसान को खेत तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर घूमना पड़ सकता है।

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