बारिश में जलने से पहले भीग गए रावण, मथुरा से आए कारीगरों के बनाए पुतले भीगने से बढ़ी चिंता
आस्था और अनुशासन की मिसाल
जयपुर। गुलाबी नगरी में शनिवार को हुई बारिश ने दशहरा पर्व के लिए रावण के पुतले तैयार करने में जुटे कारीगरों की चिंता बढ़ा दी। मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास लगने वाली रावण मंडी में कई दिनों की मेहनत से तैयार किए जा रहे रावण के पुतले बारिश की भेंट चढ़ गए। बारिश से पुतलों में इस्तेमाल होने वाला कागज, गत्ता और अन्य सामग्री भीगने से उन्हें नुकसान पहुंचने की आशंका है। ऐसे में कारीगरों के सामने पुतलों को समय पर सुखाने और तैयार करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
पीढ़ियों से आ रहे हैं जयपुर
गुलाबी नगरी में रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों का एक मुस्लिम परिवार उत्तर प्रदेश के मथुरा से आता है। बताया जाता है कि यह परिवार करीब 65 साल से अधिक समय से जयपुर में पुतले बनाने का काम कर रहा है। आदर्श नगर स्थित श्रीराम मंदिर में परिवार के सदस्य रावण के पुतले तैयार करते हैं। यह परंपरा पांच पीढ़ियों से चली आ रही है। कारीगर कई दिन पहले से ही पुतलों का ढांचा तैयार करने, कागज चिपकाने, रंग-रोगन करने और सजावट का काम शुरू कर देते हैं।
आस्था और अनुशासन की मिसाल
पुतले बनाने के दौरान परिवार मंदिर परिसर में रहकर श्रद्धा और शाकाहारी अनुशासन का पालन करता है। मथुरा से जयपुर आकर रावण के पुतले तैयार करने वाले इन कारीगरों की परंपरा धार्मिक आस्था के साथ आजीविका और सांस्कृतिक विरासत का भी उदाहरण है।
पुतलों की कीमत सजावट और आकार से तय
रावण के पुतलों की कीमत उनके आकार, सजावट और निर्माण में लगने वाली सामग्री के आधार पर तय होती है। छोटे पुतले घरेलू आयोजनों के लिए और बड़े पुतले सार्वजनिक दशहरा आयोजनों के लिए तैयार किए जाते हैं। बारिश के कारण हुए नुकसान से कारीगरों को अतिरिक्त मेहनत और लागत की चिंता सता रही है।

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