लैब से जमीन तक: नई साझेदारियों से विज्ञान, खेती, शिक्षा और छोटे कारोबारों में एआई के जरिए भारत के भविष्य को नई गति
स्थानीय युवाओं के लिए हुनर और रोजगार के नए अवसर
नई दिल्ली। खाद्य व्यवस्था को बचाने के लिए जीनोम से जुड़े बुनियादी सवालों के जवाब ढूंढने हों, शिक्षकों को बच्चों के मार्गदर्शन के लिए ज्यादा समय दिलाना हो या स्थानीय कारोबारों को आगे बढ़ाना हो, हर जगह एक बात सामने आती है। एआई का असर तब सबसे ज्यादा होता है, जब उसे उन्हीं लोगों के साथ मिलकर बनाया जाए, जिन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
प्रीलत लोबाना और लीला इब्रालहम के अनुसार भारत के पास गहरी तकनीकी प्रतिभा है, जबरदस्त विविधता है और तेजी से फैलता डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसी वजह से आज भारत व्यावहारिक इनोवेशन का केंद्र-बिंदु बन गया है। यहां दुनिया देख रही है कि अत्याधुनिक रिसर्च को जमीन पर कैसे उतारा जाता है और उससे करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी कैसे बदलती है। आज हम फसल विज्ञान, शिक्षा, खेती और आर्थिक समावेशन से जुड़ी कई नई पहलों का एलान कर रहे हैं। इन सबका मकसद जमीनी स्तर से शुरुआत करके असली बदलाव को बड़े पैमाने तक ले जाना है।
आर्थिक समावेशन के लिए एआई: भारत के छोटे कारोबारों के साथ
भारत के 9 करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनमें 34.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। फिर भी इनमें से कई के सामने एक साथ कई मुश्किलें खड़ी हैं, जो एक-दूसरे को और बढ़ाती हैं। भारत के राष्ट्रीय एआई रोडमैप में योगदान की अपनी प्रतिबद्धता के तहत Google.org देश के एमएसएमई की तरक्की तेज करने के लिए को 1.5 करोड़ डॉलर दे रहा है। इस रकम से ऐसे एआई टूल बनाए जाएंगे, जो बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो सकें और छोटे कारोबारों के लिए औपचारिक कर्ज पाना, नए बाजार ढूंढना और नियमों का पालन करना आसान बनाएं। नए समाधान खोजने के लिए इस प्रोग्राम में खुले तौर पर प्रस्ताव मंगाए जाएंगे। साथ ही कई भाषाओं में और आवाज के जरिए चलने वाला एक प्लेटफॉर्म भी बनेगा। यह प्लेटफॉर्म टियर 3 और टियर 4 कस्बों के स्थानीय युवाओं को नौकरी के लायक हुनर सिखाएगा और उन्हें सीधे छोटे कारोबारों से जोड़ेगा।
आगे की राह
विज्ञान से समाज में ठोस बदलाव लाने की जो रफ्तार हम आज देख रहे हैं, वह अभी शुरुआत भर है। वैज्ञानिकों, शिक्षकों, सरकारी नेतृत्व और जमीनी संगठनों के साथ हम अपनी साझेदारियां और गहरी कर रहे हैं और अपनी कोशिशें तेज कर रहे हैं। हमारा मकसद यह है कि आधुनिक एआई को वही समुदाय दिशा दें, जो भारत का भविष्य गढ़ रहे हैं और इसका फायदा भी उन्हीं तक पहुंचे।

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