लिव-इन का रजिस्ट्रेशन जरूरी : ब्रेकअप की भी देनी होगी जानकारी, विधानसभा के आगामी सत्र में यूसीसी बिल हो सकता है पारित
धोखे या डराकर विवाह किया तो 7 साल तक की सजा
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने राजस्थान विधानसभा में राजस्थान समान सिविल संहिता विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक के अब विधानसभा के आगामी सत्र में चर्चा के बाद पारित होने के आसार है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 342 और 366 (25) के तहत आने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों तथा संविधान के भाग-21 के तहत संरक्षित कुछ पारंपरिक अधिकारों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
जबरन शादी और गैरकानूनी तलाक पर सख्ती :
बिल में बल, धोखे या डराकर विवाह के लिए सहमति लेने पर 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाहर विवाह-विच्छेद करने पर 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। प्रतिबंधित नातेदारी में विवाह कराने पर छह महीने तक की साधारण कैद और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
सरकारी रिकॉर्ड में भी जरूरी होगा प्रमाणपत्र :
सरकारी कर्मचारियों को अपने सेवा रिकॉर्ड में विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र देना होगा। कोई सरकारी या निजी नियोक्ता कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति में बदलाव तब तक नहीं करेगा, जब तक संहिता के तहत जारी विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति उपलब्ध न हो।
रजिस्टर से छेड़छाड़ पर जेल : विवाह या तलाक से संबंधित सरकारी रजिस्टर को छिपाने, नष्ट करने या उसमें कपटपूर्वक बदलाव करने पर दो साल तक की जेल 10 हजार रुपए तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
लिव-इन रिश्ते भी आएंगे कानूनी दायरे में :
प्रस्तावित यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को भी नियमन के दायरे में रखा गया है। साथ रहने वाले वयस्क जोड़े को रजिस्ट्रार के समक्ष लिव-इन रिलेशनशिप का कथन दर्ज कराना होगा।
रिश्ता समाप्त होने पर समापन का कथन देना भी जरूरी होगा। गलत जानकारी देने या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर विधेयक के अनुसार कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है।
शादी के नियम होंगे एक समान, बहुविवाह पर लगेगी रोक :
प्रस्तावित संहिता के तहत पुरुष के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष निर्धारित रहेगी। विवाह के समय किसी भी पक्ष का पहले का पति या पत्नी जीवित नहीं होना चाहिए। यानी बहुविवाह पर रोक का प्रावधान किया गया है। बाल विवाह के मामलों में संबंधित केन्द्रीय कानून के तहत कार्रवाई होगी। विवाह के बाद 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा। निर्धारित समय में पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं करने पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। रजिस्ट्रार के नोटिस के बावजूद 30 दिनों में उपस्थित नहीं होने पर जुर्माना 25 हजार रुपए तक हो सकता है। हालांकि केवल पंजीकरण नहीं कराने से विवाह अवैध नहीं माना जाएगा।
बेटे-बेटी और माता-पिता को समान उत्तराधिकार :
बिना वसीयत मृत्यु होने पर संपत्ति के बंटवारे में पति या पत्नी, बेटे-बेटी और माता-पिता को समान अधिकार देने का प्रावधान है। वहीं संपत्ति हासिल करने के लिए किसी व्यक्ति की हत्या करने या उसकी साजिश रचने वाला व्यक्ति उत्तराधिकार से अयोग्य माना जाएगा।
राजस्थान के बाहर रहने वाले मूल निवासी भी दायरे में :
प्रस्तावित संहिता केवल राजस्थान में रह रहे लोगों तक सीमित नहीं होगी। राज्य के ऐसे मूल निवासी जो किसी दूसरे राज्य या देश में रह रहे हैं, उन पर भी इसके प्रावधान लागू होने की बात कही गई है। यानी कानून लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन जैसे मामलों में नियमों का पालन करना संबंधित नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
एक सप्ताह पहले ही कैबिनेट ने दी थी मंजूरी :
इस विधेयक के प्रारूप को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में 13 अगस्त को हुई मंत्रिमंडल बैठक में ही मंजूरी दी गई थी। उस दिन संसदीय कार्य और विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा था कि इस कानून से एक देश, एक कानून की अवधारणा पूरी होगी।

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