वो भी एक दौर था : टिकट विंडो पर लम्बी कतारें, हाउसफुल का बोर्ड और टिकट पाने की जुगत

मल्टीप्लेक्स कल्चर में दम तोड़ते सिनेमा हॉल

वो भी एक दौर था : टिकट विंडो पर लम्बी कतारें, हाउसफुल का बोर्ड और टिकट पाने की जुगत
एक दौर था जब जयपुर में नई फिल्म रिलीज होने का मतलब होता था टिकट खिड़कियों पर लंबी कतारें, हाउसफुल के बोर्ड और सिनेमाघरों के बाहर मेले सा माहौल। परिवार के साथ फिल्म देखना केवल मनोरंजन नहीं, एक सामाजिक उत्सव हुआ करता था।

जयपुर। एक दौर था जब जयपुर में नई फिल्म रिलीज होने का मतलब होता था टिकट खिड़कियों पर लंबी कतारें, हाउसफुल के बोर्ड और सिनेमाघरों के बाहर मेले सा माहौल। परिवार के साथ फिल्म देखना केवल मनोरंजन नहीं, एक सामाजिक उत्सव हुआ करता था। जब समय बदला तो तकनीक बदली और मनोरंजन के तौर-तरीके भी बदल गए। नतीजा यह हुआ कि जयपुर के कई ऐतिहासिक और लोकप्रिय सिनेमाघर धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमट गए।

गोलेछा के बंद होने पर भावुक प्रतिक्रिया
हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा चर्चा गोलेछा सिनेमा के बंद होने की रही। करीब सात दशक तक जयपुर की सिनेमा संस्कृति का प्रतीक रहा यह थिएटर हजारों लोगों की भावनाओं से जुड़ा था। चौड़ा रास्ता में स्थित यह सिनेमाघर केवल फिल्में दिखाने की जगह ही नहीं पीढि़यों की यादों का खजाना था। कई लोगों ने यहां अपनी पहली फिल्म देखी, दोस्तों के साथ समय बिताया और परिवार के साथ अनगिनत यादें संजाई। इसके बंद होने की खबर ने सोशल मीडिया पर भी भावुक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ ला दी थी।

राजमंदिर की विरासत आज भी कायम
दिलचस्प बात यह है कि जहां अधिकांश पुराने सिनेमा घर इतिहास बन चुके हैं, वहीं राज मंदिर सिनेमा आज भी अपनी भव्यता और विरासत के साथ खड़ा है। अपनी गोल्डन जुबली मना रहा यह प्रतिष्ठित थिएटर आज भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और सिनेमा प्रेमियों को आकर्षित करता है। 

सिंगल स्क्रीन थियेटर इसलिए पिछड़े
सिंगल स्क्रीन थिएटरों के पतन के पीछे कई कारण रहे। मल्टीप्लेक्स कल्चर, आधुनिक सुविधाएं, ऑनलाइन टिकट बुकिंग, मॉल आधारित मनोरंजन और तेजी से बढ़ते ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने दर्शकों की पसंद बदल दी। इसके अलावा रख-रखाव का बढ़ता खर्च और कोविड महामारी के बाद आई आर्थिक चुनौतियों ने भी कई थिएटरों की कमर तोड़ दी। 

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कभी सिने प्रेमियों की खास पसंद रहे ये सिनेमा
गोलेछा के अलावा टोंक रोड स्थित लक्ष्मी मंदिर सिनेमा भी जयपुर की पहचान हुआ करता था। वषार्ें से बंद पड़े इस सिनेमा घर को देखकर पुराने दर्शकों को अपना सुनहरा दौर याद आ जाता है। जयपुर में ऐसे कई अन्य थिएटर भी रहे, जिन्होंने शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया। राम प्रकाश, सम्राट थिएटर सहित कई अन्य थिएटर भी हैं, जो कभी सिनेमा प्रेमियों की जुबान पर रहते थे। 

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लोगों को मल्टीप्लेक्स कल्चर, आधुनिक सुविधाएं, मॉल आधारित मनोरंजन सहित एक जगह पर सभी तरह की सुविधाएं चाहिए। ये सुविधाएं मल्टीप्लेक्स में मिलती है।
राज बंसल (बॉलीवुड फिल्म वितरक)

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सिंगल स्क्रीन में वो सुविधाएं नहीं मिलती जो मल्टीप्लेक्स में मिलती है। अधिकतर मल्टीप्लेक्स बड़े-बड़े मॉल में होते है, जिसमें सभी तरह की सुख सुविधाएं मिलती है।
-दामोदर शर्मा (निवासी बड़ी चौपड़) 

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