जेडीबी आर्ट्स कॉलेज परिसर में हरियाली व सौंदर्यीकरण के नाम पर लगा दिए खतरनाक प्रतिबंधित कोनोकार्पस
छात्राओं के स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा,विशेषज्ञों ने बताया अस्थमा व जैव विविधता के लिए नुकसानदायक
कोटा । कोनोकार्पस इरेर्क्ट्स पौधा दिखने में जितना खूबसूरत है, उतना ही मानव स्वास्थ्य व बायोडायवर्सिटी के लिए घातक है। इसके बावजूद राजकीय कला कन्या महाविद्यालय प्रशासन ने बिना जांच-परख के अपने कैम्पस में कोनोकार्पस इरेक्टर्स पौधे लगा दिए। जबकि, इस पौधें के दुष्प्रभाव को देखते हुए देश के 4 बड़े राज्यों ने इसे बैन कर दिया है। क्योंकि, इन पौधों के फूलों से निकलने वाले परागरण एलर्जिक हैं, जो अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। इतना ही नहीं, अस्थमा मरीजों के सम्पर्क में आने अटैक का खतरा भी रहता है। ऐसे में सवाल उठता है, कॉलेज में जहां हजारों छात्राओं की मौजूदगी व आवाजाही रहती है वहीं, बिना जांच परख के इस तरह के खतरनाक पौधे लगाए जाना बालिकाओें के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। हालात यह है कि इस पौधे के नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए राजस्थान बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी प्रदेश में कोनोकार्पस को बैन करने की सिफारिश की हुई है।
कॉलेज की पर्यावरण समिति ने लगाए कोनोकार्पस
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कोनोकार्पस पौधे कॉलेज की पर्यावरण समिति ने लगाए हैं। यह 3 से 5 फीट ऊंचे हैं, जो मानसून में तेजी से बढ़ने के साथ इसके एलर्जिक परागरण छात्राओं के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं, इस पौधे पर तो पंछी भी घोंसला नहीं बनाते। श्वांस संबंधी बीमारियों के साथ भूजल भी अधिक सोखते हैं। जिससे आसपास उगने वाली स्थानीय प्रजाति के पेड़-पौधों भी नहीं पनप पाते।
इन 4 राज्यों ने लगाया कोनोकार्पस पर प्रतिबंध
उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कोनाकार्पस, मनुष्य के साथ बायोडायवर्सिटी के लिए भी हानिकारक है। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी-सीएसी ने कोनोकार्पस इरेक्ट्स पेड़-पौधे को मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता व पर्यावरण के लिए खतरनाक माना है।
इनका कहना है
पिछले साल साल लगाए थे यह पौधे
यह पौधे पिछले साल लगाए गए थे। जानकारी के अभाव में कॉलेज की पर्यावरण समिति द्वारा लगा दिए गए थे। नुकसान पहुंचाने वाले पौधों को कॉलेज कैम्पस में बिलकुल नहीं रखेंगे।
-प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य राजकीय कला कन्या महाविद्यालय (जेडीबी आर्ट्स)
इनके परागरण एलर्जिक होते हैं, जो अस्थमा व सांस से संबंधित बीमारियों का कारण बनाता है। इनकी जगह नीम, बरगद, पीपल, आंवला, बेल, अर्जुन जैसे पौधे लगाए जाना चाहिए, जो ज्यादा मात्रा में आॅक्सीजन जनरेट करते हैं।
-प्रो. निरजा श्रीवास्तव, बोटनी, राजकीय महाविद्यालय कोटा
यह पौधे एलर्जिक होते हैं, इनके हानिकारक दुष्प्रभावों को देखते हुए देश की कुछ राज्य सरकारों ने इसे लगाने को प्रतिबंधित किया है। इनकी जगह स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाना चाहिए। जिससे जैव विविधता बनी रहे।
-सुगना राम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन्यजीव

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