छुट्टी का दिन, अंधेरे में भी खचाखच भरा हुआ नजर आया इमरजेंसी
2 घंटे की ओपीडी में उमड़ा मरीजों का हुजूम
कोटा। 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के राजकीय अवकाश के चलते शुक्रवार को संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। त्यौहार और अवकाश के चलते सामान्य ओपीडी का समय केवल दो घंटे (सुबह 9 बजे से 11 बजे तक) निर्धारित था, जिसकी जानकारी न होने के कारण दूर-दराज से पहुंचे सैकड़ों मरीजों को इलाज के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ी। सुबह से ही अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों का तांता लग गया। गेट नंबर 2 पर स्थित पर्ची काउंटर से लेकर दवा वितरण केंद्रों और विभिन्न विभागों के ओपीडी कमरों के बाहर मरीजों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। भीड़ और दबाव के बीच मेडिसिन, सर्जरी तथा ऑर्थोपेडिक विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला और कतार में खड़े मरीजों का लगातार उपचार किया। हालांकि,ओपीडी का समय खत्म होने के बाद भी कई मरीज बिना दिखाए या केवल इमरजेंसी के सहारे लौटने को मजबूर दिखे।
इमरजेंसी ओपीडी के बाहर 100 से अधिक लोग कतार में
गेट नंबर 2 से पर्ची कटवाने के बाद अधिकांश मरीज गेट नंबर 4 स्थित इमरजेंसी ओपीडी की ओर भागे, जहाँ देखते ही देखते 100 से भी अधिक मरीज इलाज के इंतजार में लाइन में खड़े नजर आए।इस दौरान महिला और पुरुष मरीजों के लिए एक ही कतार होने से मौके पर लगे गार्ड को व्यवस्थाएं संभालने में खासी मशक्कत करनी पडी।
अब कल दुबारा आएंगे
इटावा से आई मंजू बाई ने बताया कि मुझे सांस की बिमारी है पिछले 5 महीने से यहां का इलाज चला रखा है। अभी आराम तो है दवाई खत्म हो रही थी तो दिखाने आई थी। अगर ड्यूटी डाक्टर देख लेते है तो ठीक है नहीं तो रात रहकर कल आंऊगी।
देवली से आए नरेन्द्र सुमन ने बताया कि सुबह यहां आने की जल्दी में छुट्टी का ध्यान ही नही रहा। आज तो पुरा काम नही हो पाया डॉ. को तो दिखाया अब जांच के लिए कल ही आना पडेगा।
कनवास से आए आकाश ने बताया कि हम यहा पर 10.20 पर पहुँच गए थे तो काउन्टर पर ही भीड़ के चलते अस्पताल का समय पुरा हो गया। यहां पर बेहतर इलाज की उम्मीद में आया था कान में दर्द की शिकायत थी साथ में छोटी बिटियां व पत्नी को भी दिखाना था ऐसे में अब डाक्टर तो बैठे नहीं अब में इमरजेन्सी की तरफ ही जा रहा हूँ।
ऑटोमैटिक इमरजेन्सी, रोशनी की नहीं नजर आई व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी बार-बार बिजली आने जाने से मरीज सहित चिकित्सकों को भी काफी परेशानी हुई। इस बीच मरीजों की भारी भीड़ और ओपीडी रूम के भीतर जमा मरीज व चिकित्सक मोबाइल की टॉर्च में चैक करते नजर आए। हालांकि बिजली हर 2 से 5 मिनट में आती जाती रही। इस दौरान यहां पर इमरजेन्सी रूम में ही ऑटोमैटिक इमरजेन्सी रोशनी का विकल्प नजर नहीं आया। हालांकि प्रोटोकाॅल में ऐसे स्थानों पर इमरजेन्सी रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए। वही अस्पताल अधीक्षक डॉ.आशुतोष शर्मा का कहना है कि अस्पताल में तो लाईने है, बिजली जाने पर कुछ देर बाद जनरेटर चलाया जाता है।
2 दवा काउन्टर अधिक
अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि ओपीडी समय केवल 2 घन्टे का ही होने के कारण इमरजेन्सी ओपीडी में मरीजों को इलाज जारी रखा गया। यहां पर मेडिसिन,सर्जरी व आर्थोपेडिक की युनिट 24 X 7 कार्यरत रहती है ऐसे में अस्पताल समय के बार आए मरीजो का यहां पर इलाज किया गया। साथ ही 6 नं दवा काउन्टर के अलावा बाहर की तरफ 3 नम्बर दवा काउन्टर सहित एक अन्य दवा काउन्टर को ओपीडी समय से ज्यादा समय तक खोला गया जहां पर मरीजाें को दवा दी गई।
राजकीय अवकाश के दिन सामान्य आपीडी केवल 2 घन्टे ही खुलती है। ऐसे में मरीजों के इलाज के लिए इमरजेन्सी ओपीडी में तैनात चिकित्सकों ने इलाज किया। सभी को इलाज व दवा के लिए अलग से व्यवस्था बनाई गई।
-डॉ. आशुतोष शर्मा अधीक्षक न्यू मेडिकल काॅलेज अस्पताल

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