राजकीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप : टॉपर्स की जुबानी, सफलता की कहानी, परीक्षाओं के दबाव को जीत में बदलें
रिजल्ट' के साथ अब 'क्वालिटी' पर फोकस
टाइम मैनेजमेंट, राइटिंग स्किल्स और मानसिक शांति से कठिन विषय भी आसान बन जाते हैं।
कोटा। बोर्ड परीक्षाओं की घड़ी नजदीक आते ही छात्रों के दिलों की धड़कनें तेज होने लगी हैं। सिलेबस का बोझ, अच्छे अंकों का दबाव और भविष्य की चिंता-इन सबके बीच हर छात्र के मन में एक ही सवाल है, "आखिर टॉपर बनने का सीक्रेट क्या है?" इसी ऊहापोह को दूर करने के लिए हमने बात की पिछले वर्ष के टॉपर से बातचती जिन्होंने अपनी रणनीतियों और अनुशासन के दम पर परीक्षा में करीब उच्चतम अंक हासिल कर मिसाल कायम की थी। आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए टॉपर ने बताया कि बोर्ड परीक्षा कोई डर नहीं, बल्कि अपनी काबिलियत साबित करने का एक बेहतरीन मंच है। इस विशेष बातचीत में उन्होंने न केवल अपनी 'सक्सेस स्ट्रेटजी' साझा की, बल्कि यह भी बताया कि कैसे आखिरी समय में टाइम मैनेजमेंट, राइटिंग स्किल्स और मानसिक शांति के तालमेल से मुश्किल विषयों को भी आसान बनाया जा सकता है।
नोट्स का रिवीजन और पुराने प्रश्न पत्र हैं जरूरी
कक्षा 10वीं में 90% अंक हासिल करने वाले सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने रोजाना करीब 10 घंटे तक नियमित पढ़ाई की। उन्होंने कहा, "मैंने सबसे पहले सिलेबस को बारीकी से समझा और एक समय-सारिणी (ळ्रेी३ुंह्णी) बनाई। शिक्षकों द्वारा बनवाए गए नोट्स का नियमित रिवीजन किया। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र और सैंपल पेपर हल करने से मुझे परीक्षा पैटर्न और समय प्रबंधन समझने में बहुत मदद मिली। उचित नींद और सकारात्मक सोच ने मुझे तनाव से मुक्त रखा।"
स्मार्ट सोच और निरंतरता से मिली सफलता
कक्षा 10वीं में 94% अंक और विज्ञान विषय में 98 अंक हासिल करने वाली श्यामा मीणा का कहना है कि सफलता कड़ी मेहनत के साथ-साथ स्मार्ट सोच से मिलती है। श्यामा ने बताया, "मैंने शुरूआत से ही रोजाना 10 घंटे पढ़ाई की और हर सप्ताह व महीने में रिवीजन पर जोर दिया। क्लास टेस्ट कभी मिस नहीं किए और शंका होने पर शिक्षकों से बार-बार सवाल पूछे। मेरा मानना है कि उत्तर लिखते समय समय का ध्यान रखना और आत्मविश्वास बनाए रखना बहुत जरूरी है।"
बेसिक्स को मजबूत करें और रटने के बजाय समझें
91% अंक प्राप्त करने वाली माईशा ने विज्ञान के सिद्धांतों को तार्किक रूप से समझने पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, "बोर्ड परीक्षा केवल एक शैक्षणिक चरण नहीं, बल्कि आत्म-विकास की यात्रा है। मैंने अपने बेसिक्स को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। नियमित अभ्यास और आत्म-मूल्यांकन (रीकॉल) से मुझे गलतियों को सुधारने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिली।"
एक्टिव रिकॉल तकनीक और संघर्ष से जीत
रोशनी सैनी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। कक्षा 10वीं के दौरान दादी की तबीयत खराब होने के कारण वे सुबह 4 बजे उठकर खाना बनाती थीं और फिर स्कूल जाती थीं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद गणित जैसे विषय में 97 अंक प्राप्त किए। रोशनी ने बताया, "मैंने नोट्स को केवल पढ़ने के बजाय 'एक्टिव रिकॉल' (दिमाग पर जोर देकर याद करना) तकनीक का उपयोग किया। गणित मेरा कमजोर विषय था, लेकिन शिक्षकों की सलाह मानकर हर प्रश्न का तीन-तीन बार अभ्यास किया, जिससे मेरा डर खत्म हो गया।"
प्लानिंग और क्लास टेस्ट से निखरी प्रतिभा
95.67% अंक हासिल करने वाली भाविका शंभवानी ने अपनी सफलता का श्रेय प्लानिंग को दिया। उन्होंने कहा, "मैं स्कूल के हर टेस्ट को गंभीरता से देती थी और परिणाम जानने के लिए उत्सुक रहती थी। कम अंक आने पर मैं शिक्षकों से सही उत्तर पूछती और घर पर दोबारा तैयारी करती थी। अच्छे अंकों के लिए गुरुजनों की सलाह मानना और प्लानिंग के साथ नियमित पढ़ाई करना ही सबसे कारगर तरीका है।"
इनका कहना है
एनसीईआरटी की किताबों को फोलो करते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए नोट्स बनाते है। पढ़ाने से पहले प्रत्येक चैप्टर की तैयारी की जाती है। साथ ही समय-समय पर रिवाईज करवाते है। अर्द्धवार्षिक परीक्षा में अधिक से अधिक कोर्स करवाने की कोशिश की जाती है। स्कूल में प्री बोर्ड पैटर्न पर टैस्ट लिया जाता है। अभिभावकों को विद्यार्थियों की प्रोगे्रस रिपोर्ट दिखाई जाती है।
-शिल्पा शर्मा, वरिष्ठ साइंस अध्यापिका,महात्मा गांधी राज. विद्या. मल्टीपरपज गुमानपुरा
एग्जाम के दौरान विद्यार्थी मोबाइल से दूरी बनाएं रखे
परीक्षा देने से पहले विद्यालय में बच्चों को अच्छी तरह से तैयारी करवाई जाती है। साथ ही कमजोर बच्चों पर अधिक ध्यान देकर उनको पढ़ाया जाता है। समय-समय पर बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन किया जाता है। एग्जाम देते समय विद्यार्थी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखे। व मोबाइल से दूरी बनाकर रखे।
-आशुतोष मथुरिया,प्रिंसिपल, महात्मा गांधी राज. विद्या. मल्टीपरपज गुमानपुरा
शिक्षा के क्षेत्र में जब विद्यार्थी जब आगे बढ़ाता है तो वहां विद्यालय और परिवार को गौरंवित करता है। इस प्रकार से एक राजकीय विद्यालय के शैक्षिक वातावरण में टीचर अच्छा रिजल्ट दे रहे। और अब राजकीय विद्यालय रिजल्ट के साथ क्वालिटी पर ध्यान दे रहा हैं।
-रामचरण मीणा,डीईओ, माध्यमिक कोटा।

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