Voice Of Youth : मासूमों की जान से खिलवाड़, सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहीं बाल वाहिनियां!
कहीं टेम्पो में लटककर तो कहीं ओवरलोड ऑटो में सफर कर रहे बच्चे, नियम कागजों में कैद
कोटा। नौनिहालों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियम आखिर किसके लिए हैं? बाल वाहिनियों के लिए पीले रंग की बस, सीसीटीवी कैमरे, वर्दीधारी अनुभवी चालक और वाहन पर स्कूल का नाम व संपर्क नंबर अंकित करने जैसे नियम निर्धारित हैं, लेकिन सड़कों पर इनकी पालना होती नजर नहीं आती। दैनिक नवज्योति के 'वॉयस ऑफ यूथ' अभियान में युवाओं ने इस गंभीर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। युवाओं का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अभिभावकों को भी अपनी जवाबदेही समझनी होगी।
बसों की फिटनेस जांचें, लापरवाही पर हो कार्रवाई
स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बसों की समय-समय पर फिटनेस जांच होनी चाहिए, ताकि किसी संभावित हादसे का पहले ही पता लगाया जा सके। स्कूल संचालक चालक नियुक्त करने से पहले उसका बैकग्राउंड और पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं। यदि कोई स्कूल बच्चों को लाने-ले जाने के लिए टेम्पो का इस्तेमाल करता है तो संबंधित स्कूल के खिलाफ मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। हादसा होने पर स्कूल के संस्था प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही अभिभावकों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाना चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर सभी की जिम्मेदारी तय हो सके।
-फिजा खान, युवती
पुलिस प्रशासन भी निभाए अपनी जिम्मेदारी
बच्चों को सुरक्षित स्कूल लाने-ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होती है। इसलिए स्कूलों को बाल वाहिनी से जुड़े सभी नियमों की अनिवार्य रूप से पालना करनी चाहिए। यदि कोई स्कूल नियमों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में केवल शिक्षा विभाग ही नहीं, पुलिस प्रशासन को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। पुलिस को समय-समय पर सड़कों पर चलने वाली बाल वाहिनियों की जांच करनी चाहिए। क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने, दस्तावेजों की कमी या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित वाहन को सीज किया जाना चाहिए। बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शना नहीं चाहिए।
-पूजा वर्मा, स्टूडेंट
सड़क पर रोककर हो बाल वाहिनियों की जांच
बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस को गंभीरता दिखाते हुए सख्ती बरतनी चाहिए। बाल वाहिनियों की फिटनेस, चालकों के अनुभव और उनके बैकग्राउंड की नियमित जांच होनी चाहिए। केवल कागजों में नियमों की पालना दिखाने से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को रास्ते में चल रही स्कूल बसों और अन्य बाल वाहिनियों को रोककर औचक निरीक्षण करना चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि वाहन में निर्धारित क्षमता के अनुसार ही बच्चे बैठे हैं या नहीं, सीसीटीवी कैमरे और जरूरी सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं या नहीं। यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो स्कूल प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा जाए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
-नैतिक खंडेलवाल, स्टूडेंट
बच्चों को असुरक्षित वाहनों में न भेजें अभिभावक
बच्चों की सुरक्षा में अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। माता-पिता को संभव हो तो बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ना और लाना चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो बच्चों को क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने वाले टेम्पो या ऑटो में नहीं भेजना चाहिए। स्कूल प्रशासन की ओर से बाल वाहिनी की व्यवस्था किए जाने पर अभिभावकों को भी यह जांचना चाहिए कि वाहन में सभी जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। चालक का व्यवहार, वाहन की फिटनेस और बच्चों को बैठाने की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है। यदि कोई कमी नजर आती है तो अभिभावकों को स्कूल के संस्था प्रधान से जवाब मांगना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा के मामले में लापरवाही नहीं, सतर्कता जरूरी है।
-प्रखर खंडेलवाल, स्टूडेंट

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