Voice of Youth : खाद्य पदार्थों में मिलावट पर सख्ती जरूरी, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
जांच में देरी से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद
कोटा। खाने की थाली में क्या परोसा जा रहा है, इसकी शुद्धता की गारंटी आखिर कौन लेगा? दैनिक नवज्योति के ह्यवॉइस ऑफ यूथह्ण में युवाओं ने खाद्य पदार्थों में मिलावट को आमजन की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि सरकार को इस पर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। युवाओं का सुझाव है कि मिलावट साबित होने पर दोषियों को कठोर सजा मिले, जरूरत पड़ने पर उनके कारोबार पर रोक लगाई जाए और खाद्य पदार्थों की नियमित जांच हो। इसके साथ ही आमजन को भी जागरूक होकर संदिग्ध खाद्य पदार्थों की सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।
सख्त कानून से लगेगी लगाम
सरकार को खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कड़ा कानून बनाना चाहिए। केवल जुर्माना लगाने से मिलावट पर प्रभावी रोक नहीं लग पाएगी। दोषियों के लिए ऐसी सजा का प्रावधान होना चाहिए, जिससे व्यापारी मिलावट करने से पहले सौ बार सोचें। मिलावट कम होगी तो आमजन की सेहत सुरक्षित रहेगी। इसके साथ ही खाद्य पदार्थ खरीदते समय लोगों को भी उनकी गुणवत्ता और शुद्धता के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
-कृष्णा मीना, कॉलेज स्टूडेंट
त्योहार ही नहीं, पूरे साल हों सैंपल
यह अच्छी बात है कि फूड इंस्पेक्टर खाद्य पदार्थों की जांच कर रहे हैं, लेकिन जांच अभियान केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अधिकारियों को पूरे साल नियमित रूप से सैंपल लेने चाहिए। दुकानों का निरीक्षण कर व्यापारियों को खाद्य सुरक्षा के नियमों की जानकारी भी देनी चाहिए। लगातार निगरानी रहने से मिलावट करने वालों में कार्रवाई का डर रहेगा और धीरे-धीरे इस पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही कानून को भी सख्त बनाया जाना चाहिए।
-धीरज धाकड़, कॉलेज स्टूडेंट
जांच रिपोर्ट जल्द आए, तभी होगी कार्रवाई
यदि किसी दुकान पर खाद्य पदार्थ में मिलावट का संदेह हो तो संबंधित उत्पाद को नियमानुसार तत्काल सीज किया जाना चाहिए, ताकि जांच पूरी होने तक उसे बेचा न जा सके। जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होने पर दुकानदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि वह दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करे। समय पर जांच और कार्रवाई ही मिलावट रोकने का प्रभावी तरीका है।
-शिल्पा सेन, कॉलेज स्टूडेंट
कार्रवाई की हो नियमित मॉनिटरिंग
अधिकारी खाद्य पदार्थों के सैंपल तो लेते हैं, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया में देरी होने से इसका प्रभाव कम हो जाता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे मामलों का समय पर निस्तारण हो और दोषियों पर जल्द कार्रवाई की जा सके। उच्चाधिकारियों को भी निचले स्तर के अधिकारियों के कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग करनी चाहिए। इससे जांच व्यवस्था मजबूत होगी और मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
-वेदांग सैनी, कॉलेज स्टूडेंट

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