रणथम्भौर के जंगल में कायम है ‘जय’ की बादशाहत, जोन 6 से 10 तक चलता है दबदबा
2016 में मां लाडली के साथ पहली बार नजर आया बाघ 'जय'
जयपुर। सवाई माधोपुर के रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बाघों की दुनिया भी किसी राज-पाट से कम नहीं है। यहां हर नर बाघ को अपना इलाका बचाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है। इन्हीं में एक है बाघ ‘जय’। जिसने करीब 10 साल की उम्र में अपने इलाके पर मजबूत पकड़ बना रखी है।
2016 में मां लाडली के साथ पहली बार आया नजर
जय का आधिकारिक कोड आरबीटी 108 है। उसका जन्म वर्ष 2016 में हुआ था। स्थानीय गाइडों ने उसे ‘जय’ नाम दिया। उसे पहली बार उसकी मां बाघिन टी-08 लाडली के साथ देखा था। करीब दो वर्ष की उम्र तक साथ रहे और बाद में अलग-अलग विचरण करने लगे।
जोन 6 से 10 तक क्षेत्र पर मजबूत पकड़
बाघ जय का इलाका जोन 6 से जोन 10 तक फैला हुआ बताया जाता है। वह जंगल की पगडंडियों और वन क्षेत्रों में गश्त करता दिखाई देता है। अपने इलाके की सीमाएं तय करने के लिए वह मूत्र छिड़ककर गंध के निशान छोड़ता है। पेड़ों के तनों पर पंजे मारता है और जमीन खुरचता है। पर्यटकों और वाइल्ड लाइफ लवर्स ने जोन 6, 7 और 10 में उसकी दहाड़ सुनने की जानकारी दर्ज की है।
दूसरे बाघों से संघर्ष में लगे जख्मों के निशान से भरा है शरीर
जय के क्षेत्र के आसपास 3 से 4 प्रतिस्पर्धी नर बाघों की मौजूदगी बताई है। ऐसे में अपने इलाके की सीमाओं को बनाए रखना उसके लिए लगातार चुनौती है। दूसरे नर बाघ के उसके क्षेत्र में प्रवेश करने पर जय उसका पीछा कर उसे बाहर खदेड़ने की कोशिश करता है। जय के शरीर पर पहले भी चोटों के निशान देखे जाने की जानकारी दी है।
उम्र बढ़ने के बावजूद सक्रिय
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के डीसीएफ मानस सिंह का कहना है कि करीब 10 वर्ष की उम्र में जय वयस्क नर बाघ की श्रेणी में है। वह अब भी इलाके में विचरण और गंध के निशान छोड़ने जैसी गतिविधियां करता है।

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