पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा एक्शन: पहले दिन हेल्पलाइन पर मिली 2,000 शिकायतें, AI से होगी जांच
मुख्यमंत्री खुद करेंगे निरीक्षण
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू की गई टोल-फ्री भ्रष्टाचार-रोधी हेल्पलाइन के कामकाज के पहले ही दिन लगभग 2,000 शिकायतें मिलीं। पश्चिम बंगाल राज्य सचिववालय (नबन्ना) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा घोषित और बुधवार से शुरू इस हेल्पलाइन को इसलिए शुरू किया गया ताकि नागरिक कथित भ्रष्टाचार एवं आपराधिक गतिविधियों की रिपोर्ट सीधे राज्य प्रशासन को कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि शिकायतें सिर्फ़ कट-मनी, सिंडिकेट के कामकाज या गैर-कानूनी टोल वसूली के आरोपों तक ही सीमित नहीं थीं।
नबान्न कंट्रोल रूम को अन्नपूर्णा भंडार योजना, ज़मीन एवं संपत्ति विवाद, सड़कों की खराब स्थिति, जल निकासी की समस्याओं और जल-जमाव से जुड़ी शिकायतें भी मिलीं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नियंत्रण कक्ष में प्राप्त प्रत्येक शिकायत को संबंधित विभाग को अग्रेषित किया जा रहा है। जिन चार खास श्रेणियों के लिए हेल्पलाइन शुरू की गई, उनसे जुड़ी शिकायतों को तुरंत कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के पास भेजा जा रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा भवानी भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में शुरू की गई चार टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं : कट-मनी की शिकायतों के लिए 155334, सिंडिकेट से जुड़े अपराधों के लिए 155335, अवैध रोड टैक्स या टोल वसूली के लिए 155337 और अवैध शराब के कारोबार के लिए 155339 नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकारी निर्देशों के अनुसार, इन नंबरों पर रोज़ाना सुबह आठ बजे से रात 10 बजे के बीच शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। नबन्ना ने एक विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया है, जिसका मुख्यमंत्री के खुद निरीक्षण करने की उम्मीद है।
सरकार ने चेतावनी दी है कि हेल्पलाइन का गलत इस्तेमाल करने या निजी दुश्मनी के कारण गलत जानकारी देने वाले शख्स पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने कहा कि हेल्पलाइन पर आने वाली हर कॉल रिकॉर्ड की जाएगी और भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर उन रिकॉर्डों को दोबारा हासिल करने की व्यवस्था भी की जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रशासन शिकायतों के शुरुआती वर्गीकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल की संभावना पर विचार कर रहा है, जिसके बाद पुलिस अधिकारी हर शिकायत की अलग-अलग जांच करेंगे और ज़रूरी कार्रवाई करेंगे।
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि प्राप्त शिकायतों की संख्या, निपटाई गई शिकायतों और की गई कार्रवाई की जानकारी देने वाली समय-समय पर तैयार रिपोर्ट, निगरानी के लिए नियमित रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएंगी।

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