मंत्रिमंडल के सदस्य नहीं है नागेंद्र, राज्यपाल ने स्वीकार किया इस्तीफा

राजनीतिक विवाद के बीच दिया था इस्तीफा

मंत्रिमंडल के सदस्य नहीं है नागेंद्र, राज्यपाल ने स्वीकार किया इस्तीफा
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बी. नागेंद्र का मंत्री पद से इस्तीफा मंजूर कर लिया। वाल्मीकि निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के विवाद के बीच नागेंद्र ने इस्तीफा दिया था। भाजपा-जदएस ने मामले की पूरी जांच और राशि सरकारी खजाने में लौटाने की मांग तेज कर दी है। इस्तीफे के बाद नागेंद्र और श्रीरामुलु के बीच सियासी तकरार भी बढ़ गई।

बेंगलुरु। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बी. नागेंद्र का मंत्री पद से इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लिया है और राज्यपाल कार्यालय ने इस फ़ैसले की जानकारी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कार्यालय को दे दी है। नागेंद्र ने 28 अगस्त को इस्तीफ़े की घोषणा की थी और बाद में शिवकुमार के सरकारी आवास 'कृष्णा' में उन्हें इस्तीफ़ा पत्र सौंपा था। उस समय हालांकि इस्तीफ़ा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया था। मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कहा गया, “ मैं कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र का मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करता हूं।”

राज्यपाल द्वारा इस्तीफा स्वीकार किया जाने के बाद नागेंद्र अब शिवकुमार मंत्रिमंडल के सदस्य नहीं हैं। नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा था कि वह अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा दे रहे हैं, ताकि इस विवाद से सरकार या कांग्रेस को शर्मिंदगी न उठानी पड़े। इस्तीफ़ा सौंपने के बाद मुख्यमंत्री के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा था कि यह फ़ैसला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या जनता दल :सेक्युलर: (जद एस) की जीत नहीं है, बल्कि इसका मकसद विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान सरकार का बचाव करना है।

इस बीच, भाजपा और जदएस ने कहा है कि वे वाल्मीकि निगम मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर अपना अभियान जारी रखेंगे। उन्होंने मांग की है कि निगम से कथित तौर पर इधर-उधर किये गये पैसे को वापस लाकर सरकारी खजाने में जमा किया जाये और अंततः इसका लाभ अनुसूचित जनजाति समुदाय को मिले। विपक्ष ने सैकड़ों बैंक खातों के ज़रिए हुए राशि की लेन-देन की जांच की भी मांग की है और कहा है कि जिन लोगों ने इन लेन-देन में मदद की या उन्हें मंज़ूरी दी, उनकी पहचान की जानी चाहिए। इस्तीफ़े के बाद नागेंद्र और पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी भी शुरू हो गयी है।

नागेंद्र ने संकेत दिया था कि वे विधायक पद से भी इस्तीफ़ा देने को तैयार हैं और उन्होंने श्रीरामुलु को मतदाताओं के सामने उनका सामना करने की चुनौती दी। इसके जवाब में श्रीरामुलु ने कहा कि 2028 के विधानसभा चुनावों में नागेंद्र जिस भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, वह उनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे। नागेंद्र का इस्तीफ़ा मंज़ूर होने से इस विवाद में एक नया राजनीतिक पहलू जुड़ने की उम्मीद है, विपक्ष का कहना है कि सिर्फ़ कैबिनेट से हटना काफ़ी नहीं होगा और कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी कड़ी की जांच होनी चाहिए।

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