पवन खेड़ा का धामी सरकार पर हमला, बोले- अडानी के लिए टेंडर की 86 में से 84 शर्तें बदलीं
एक बार फिर गौतम शरणम् गच्छामि
नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने 1320 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजना के लिए पहले सार्वजनिक क्षेत्र के यूजेवीएन और टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम को रद्द किया और बाद में टेंडर की 86 में से 84 शर्तें बदलकर अडानी पावर को उसी परियोजना को देने का रास्ता साफ किया। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 2024 में मुख्यमंत्री धामी ने कोयला मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था कि यूजेवीएन और टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम के तहत 1320 मेगावाट का ताप विद्युत संयंत्र लगाया जाए और इसके लिए कोयला उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि करीब छह महीने बाद कोयला मंत्रालय से परियोजना को मंजूरी मिल गयी, लेकिन 16 जनवरी 2025 को उत्तराखंड सरकार ने अचानक इस संयुक्त उपक्रम को रद्द कर दिया।
खेड़ा ने कहा कि संयुक्त उपक्रम की ओर से परियोजना को समय पर पूरा करने की तैयारी की गयी थी और परियोजना को लेकर प्रस्तुतियां भी दी जाने लगी थीं, लेकिन अचानक उत्तराखंड सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों की क्षमता को सवालों के घेरे में डालते हुए इसे यह कहते हुए रद्द कर दिया कि उपक्रम समय पर काम पूरा नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद तीन फरवरी 2025 को टेंडर निकाला गया और टेंडर जारी करने वाली उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने 86 में से 84 शर्तों में बदलाव की मांग की, जिन्हें बाद में बदल दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बदली गयी शर्तों में 1320 मेगावाट बिजली एक ही बोलीदाता से लेने और संयंत्र देश में कहीं भी स्थापित किए जाने की अनुमति जैसी शर्तें शामिल थीं। उन्होंने कहा कि निर्माण अवधि भी बढ़ायी गयी और टैरिफ में फिक्स्ड चार्ज की सीमा 70 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गयी। इससे अडानी पावर से 25 साल तक बिजली खरीदने का रास्ता साफ हुआ। खेड़ा ने कहा कि उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 25 अगस्त को अडानी पावर से 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली 25 साल तक खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है और तय टैरिफ 5.746 रुपये प्रति यूनिट है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए बिजली उत्पादन संयंत्र छत्तीसगढ़ में स्थापित किया जाएगा और कोयले की माइनिंग, बिजली उत्पादन तथा उसके परिवहन से लेकर बिजली की बिक्री तक की पूरी व्यवस्था अडानी समूह से जुड़ी होगी।
उन्होंने कहा कि ''पैसा उत्तराखंड का, कोयला छत्तीसगढ़ का और फायदा अडानी का'' वाली स्थिति बनायी गयी है। खेड़ा ने कहा कि टेंडर की बदली गयी शर्तों के तहत यूनिट-एक के लिए 42 महीने और यूनिट-दो के लिए 48 महीने की निर्माण अवधि रखी गयी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों से परियोजना के लिए एक खास कंपनी के अनुकूल परिस्थितियां तैयार की गयीं। उन्होंने इसे ''भाजपा की 420 टीम'' द्वारा मैच जिताने के लिए पिच तैयार करने जैसा बताया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने पहले राज्य के लिए संयुक्त उपक्रम बनाकर बिजली परियोजना लगाने की पहल की थी और केन्द्र से कोयला उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया था, लेकिन बाद में उसी प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया। इसके बाद टेंडर की शर्तों में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ और अंततः अडानी पावर से बिजली खरीदने का निर्णय लिया गया। खेड़ा ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज करते हुए कहा, ''एक बार फिर गौतम शरणम् गच्छामि'' हो गया।

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