राज्यसभा में प्रश्नकाल बाधित: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर विपक्ष का हंगामा, खड़गे पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री लगातार सदन से अनुपस्थित

राज्यसभा में प्रश्नकाल बाधित: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर विपक्ष का हंगामा, खड़गे पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप
राम मंदिर ट्रस्ट पर लगे आरोपों और चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर राज्यसभा में विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा किया। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की अपीलों के बावजूद विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे, जिससे प्रश्नकाल बाधित हुआ।

नई​ दिल्ली। चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल बाधित रहा और सदन की कार्यवाही करीब 20 मिनट बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। इसी मुद्दे पर हंगामे के कारण शून्यकाल में भी सदन की कार्यवाही बीच में स्थगति करनी पड़ी थी। उसके बाद दोपहर 12 बजे जब प्रश्नकाल की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। पहला प्रश्न राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा का था जो उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से संबंधित था। लेकिन जब सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने पहला पूरक प्रश्न पूछने के लिए उनका नाम पुकारा तो उन्होंने कहा, "पूरा देश जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री लगातार सदन से अनुपस्थित क्यों हैं।"

इसके बाद सभापति ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही सदन की कार्यवाही जारी रखी। इस दौरान उन्होंने किसी भी विपक्षी सदस्य का नाम प्रश्न पूछने के लिए नहीं पुकारा। वह बीच-बीच में उनसे अपनी सीट पर जाने की अपील करते रहे जिसका हंगामा कर रहे सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि विपक्षी सदस्य हंगामा बंद नहीं करते हैं तो वह नाम लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। कभी-कभी सत्ता पक्ष के सदस्य भी खड़े होकर विपक्षी सदस्यों से कुछ कहते देखे गये।

करीब 20 मिनट तक प्रश्नकाल की कार्यवाही चलाने के बाद सभापति ने तमिलनाडु से द्रमुक के तिरुचि शिवा को बोलने का मौका दिया। सभापति के पहले ही आगाह कर देने के बाद भी शिवा ने राज्य विधानसभा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित मुद्दा उठाना चाहा जिसकी सभापति ने उन्हें अनुमति नहीं दी और सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले, पूर्वाह्न 11 बजे सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद जैसे ही शून्यकाल की कार्यवाही शुरू करनी चाही तो विपक्षी सदस्यों ने अपनी जगह से उठकर तेज आवाज में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया। 

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट को बहुमूल्य भेंटों, जमीन की खरीद- फरोख्त और दान को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट का गठन सरकार ने किया था और प्रधानमंत्री ने इस बारे में घोषणा की थी। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी मोदी मौजूद थे। इस सब को देखते हुए सरकार तथा प्रधानमंत्री की चढ़ावा चाेरी के मुद्दे पर जवाबदेही बनती है। उन्होंने कहा कि अब सीबीआई, ईडी और अन्य प्रवर्तन एजेंसियां कहां हैं, इस मामले की जांच क्यों नहीं करतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है और उसे लोगों से माफी मांगनी चाहिये। उनकी इस बात का सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच तीखी नोक- झोंक और नारेबाजी हुई।

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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लोग सदन में भी और बाहर भी हंगामा करते हैं। उन्होंने खरगे पर अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सदन केवल उनके लिए नहीं है और सदस्यों को भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिये। उन्होंने कहा कि खरगे को हर बार बोलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिये क्योंकि वह केवल अपनी बात करते हैं और दूसरे सदस्यों की बात नहीं सुनते।

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रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने हमेशा भगवान राम का अपमान किया है। ये भगवान राम और राम मंदिर के विरोधी हैं और अब राजनीति करने के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये भगवान राम का अस्तित्व नहीं मानते और इन्होंने राम मंदिर बनाये जाने का विरोध किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष चढ़ावा चोरी के नाम पर नाटक नहीं कर सकते और इस मुद्दे पर बात करने से पहले इन्हें माफी मांगनी चाहिये। इस बीच शिवा ने तमिलनाडु विधानसभा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। इस पर सभापति ने कहा कि यह राज्य का विषय है। 

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