जी-4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द सुधार की मांग दोहराई
80 साल पुराने ढांचे में तत्काल बदलाव की मांग
नई दिल्ली। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान-जी 4 देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द सुधार लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि जी 4 देशों के मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में हुई बैठक में कहा है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद आज की भू-राजनीतिक स्थिति को नहीं दर्शाती है और उसके प्रतिनिधित्व, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं।
जी 4 मंत्रियों ने सुरक्षा परिषद में सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता, आई जी एन की 80वें सत्र की चर्चा की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बदलते और चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक माहौल में सुरक्षा परिषद में सुधार पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। जी 4 समूह ने कहा कि सुरक्षा परिषद की स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता का विस्तार सुधार का अहम हिस्सा है। उन्होंने अफ्रीका, एशिया-प्रशांत तथा लैटिन अमेरिका और कैरेबियन जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले या प्रतिनिधित्व से वंचित क्षेत्रों और समूहों की दोनों श्रेणियों में बेहतर भागीदारी पर जोर दिया।
मंत्रियों ने आई जी एन के 80वें सत्र के दौरान अफ्रीकी समूह की ओर से पेश किए गए सुधार मॉडल का स्वागत किया और सुरक्षा परिषद में अफ्रीका को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के मामले के लिए समर्थन दोहराया, जिसमें स्थायी सदस्यता भी शामिल है। जी 4 ने कहा कि 18 साल की गतिविधियों के बावजूद सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस नतीजे देने में काफी हद तक विफल रहा है। मंत्रियों ने पिछले आई जी एन सत्र में हुई प्रगति की कमी पर भी चिंता जताई और वार्ता शुरू होने से पहले पेश किए गए तथाकथित 'ब्रिजिंग प्रस्ताव' पर गंभीर आपत्ति दर्ज की। उनके अनुसार, यह प्रस्ताव दोनों श्रेणियों में सदस्यता के विस्तार के पक्ष में स्पष्ट बहुमत वाले सदस्य देशों के विचारों को ध्यान में नहीं रखता।
जी4 देशों ने आगे अन्य सुधार समर्थक समूहों के साथ सहयोग बढ़ाने और साझा मॉडल तैयार करने की बात कही। बैठक में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान डेविड वाडेफुल, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि सुधार पर चर्चा केवल आई जी एन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

Comment List