खान निदेशक एमपी मीणा का छह माह का कार्यकाल आज पूरा, बीएस सोढा- महेश माथुर और जेके गुरुबक्षाणी के नाम चर्चा में
एमपी मीणा को 31 दिसंबर तक अतिरिक्त कार्यकाल देने का विकल्प
जयपुर। खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशक एमपी मीणा का छह माह का बढ़ाया गया कार्यकाल आज पूरा हो रहा है। ऐसे में अब विभाग में नए खान निदेशक की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। निदेशक पद के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। वरिष्ठता क्रम में बीएस सोढा, महेश माथुर और जेके गुरुबक्षाणी के नाम प्रमुख माने जा रहे हैं। विभागीय स्तर पर इस बात पर भी नजर है कि सरकार निदेशक पद की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारी को ही सौंपती है या वर्तमान व्यवस्था को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है।
विभागीय अधिकारी को जिम्मेदारी मिलने से तकनीकी कामकाज में समन्वय
खान निदेशक का पद तकनीकी और प्रशासनिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। विभागीय अधिकारी को निदेशक बनाए जाने पर फाइलों, खनन नीति और मैदानी अमले के बीच समन्वय सहज रहने की संभावना है। विभाग के तकनीकी विषयों की जानकारी होने के कारण निर्णय प्रक्रिया में भी विभागीय स्तर पर बेहतर तालमेल हो सकता है। वहीं, यदि निदेशक पद विभाग से बाहर के अधिकारी को दिया जाता है तो तकनीकी विषयों और विभागीय कामकाज के बीच समन्वय के लिए अतिरिक्त प्रयास की जरूरत पड़ सकती है।
महेश माथुर का नाम भी प्रमुखता से
वरिष्ठता और विभागीय अनुभव के लिहाज से महेश माथुर का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल माना जा रहा है। इसके अलावा बीएस सोढा और जेके गुरुबक्षाणी भी वरिष्ठता क्रम में महत्वपूर्ण नाम हैं। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर होना है।
एमपी मीणा को 31 दिसंबर तक अतिरिक्त कार्यकाल देने का विकल्प
नए निदेशक की नियुक्ति में समय लगने की स्थिति में एक विकल्प एमपी मीणा को 31 दिसंबर तक तीन माह का अतिरिक्त कार्यकाल देने का भी बताया जा रहा है। इससे नए निदेशक के चयन तक विभागीय कामकाज में निरंतरता बनाए रखी जा सकती है। अब नजर सरकार के निर्णय पर है। निदेशक के चयन में वरिष्ठता, पात्रता और विभाग की प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा।

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