घर-आंगन में कीचड़, बीमारियों के ढे़र पर जलता चूल्हा, ऐसे जी रहा शंभूपुरा
आजादी के 76 साल बाद भी नरकीय जीवन जीने को मजबूर बाशिंदे
कोटा। एक तरफ चूल्हे पर खाना बन रहा तो दूसरी तरफ उसी आंगन में कीचड़ और गंदा पानी जमा है। इसी गंदगी के बीच मासूम स्कूल के लिए तो महिलाएं, पुरूष और बुजुर्ग रोजी-रोटी की तलाश में चौखट पार करते। आंगन में फैली दहलीज के बाहर की गंदगी की यह तस्वीर किसी जंगली क्षेत्र की नहीं बल्कि कोटा नगर निगम के वार्ड-1 और लाडपुरा विधानसभा का क्षेत्र शंभुपुरा की है। देश की आजादी के 76 साल बाद भी यहां की आबादी नरकीय जीवन जीने को मजबूर है।
दरअसल, वार्ड में न तो पक्की सड़क है और न ही नालियां। गंदे पानी की निकासी का कोई समुचित इंतजाम भी नहीं है। मजबूरन कई परिवारों ने आंगन में ही होद बना रखी है, जिसमें ही घरों से निकलने वाले गंदा पानी जमा हो रहा है, जो ओवरफ्लो होकर आंगन में कीचड़ के रूप में फैला हुआ है। इससे खतरनाक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
घर से बाहर निकला चुनौती, स्कूल की राह भी कीचड़भरी
शंभूपुरा के बाशिंदों के लिए घर से बाहर निकला ही चुनौती बना हुआ है। वहीं, बच्चों के लिए स्कूल जाने का रास्ता तक कीचड़ से सना है। महिलाएं और बुजुर्ग भी इसी स्थिति में रोजमर्रा के काम निपटाते हैं। बरसात में समस्या और भयावह हो जाती है। जल निकासी का रास्ता नहीं होने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है और गंदगी लंबे समय तक बनी रहती है।
बीमारियों का कहर, सर्वे में बढ़ी मरीजों की संख्या
दैनिक नवज्योति में शंभूपुरा की बदहाली की खबरें प्रकाशित होने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम पिछले दो दिन से यहां मेडिकल कैम्प कर रही है। जिसमें संक्रमण, चर्म रोग, फंगल इंफेक्शन, बुखार, जुकाम सहित अन्य बीमारियों के कई मरीज मिले हैं। चिकित्सकों ने लोगों के बीमार होने के पीछे गंदगी को बड़ा कारण बताया।
गंदगी और बीमारियों के बीच खेलता बचपन
क्षेत्रवासी दिनेश, सीताराम, धर्मराज कहते हैं, जिस आंगन में परिवार बैठता है, बच्चे खेलते हैं और खाना बनता है, उसी जगह गंदा पानी और कीचड़ जमा है। कई परिवारों के लिए यही सीमित जगह रहने और रोजमर्रा के कामों का हिस्सा है। बाहर की बदहाली अब घर की चौखट पार कर आंगन तक पहुंच चुकी है। गांव के लोगों ने कई बार नगर निगम जाकर भी समस्याएं बताई लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
चुनाव में वादे, अब तक जमीन पर नहीं उतरे
रामनाथ भील, रामलाल, राकेश का कहना था कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि गांव में आते हैं और सड़क, नाली सहित मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के वादे किए थे, जो आज तक पूरे नहीं हुए। निकाय चुनाव के दौरान वार्ड की गलियों में गिट्टियां डलवाई गई थीं और बाद में सड़क बनवाने का भरोसा दिलया, वह भी पूरा नहीं हुआ।
पानी भी खरीदकर पीना पड़ रहा
क्षेत्रवासियों ने बताया कि शंभुपुरा शहरी सीमा में शामिल होने के बावजूद नगर निगम ने वार्ड का विकास नहीं किया। इलाके में जलदाय विभाग की टंकी बनी हुई है लेकिन उससे पानी आधे हिस्से में ही आता है लेकिन ऊपरी हिस्से में पाइप लाइनें तक नहीं बिछी है। मजबूरन बोरिंग का पानी खरीदना पड़ता है। बिजली की भी समूचित व्यवस्था भी नहीं है। कई इलाकों में अंधेरा पसरा रहता है।
एक्सपर्ट व्यू : गंदगी-कीचड़ से डेंगू से सांस तक की बीमारी
घरों के आसपास गंदा पानी और कीचड़ जमा होने और उनके सम्पर्क में रहने से कई गंभीर बीमारियों फैलती हैं। जिनमें मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड, पीलिया, दस्त, चर्मरोग, संक्रमण, खुजली, फंगस, घाव होना, त्वचा पर रैशेज होने का खतरा बना रहता है। वहीं, सड़ते हुए कीचड़ और कचरे से उठने वाली दुर्गंध और हानिकारक गैसों से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। साथ ही एलर्जी की भी समस्याएं भी बढ़ सकती है। इन बीमारियों से बचाव के लिए स्वच्छता व नियमित साफ-सफाई जरूरी है।
-डॉ. पंकज जैन, सीनियर फिजिशियन मेडिकल कॉलेज अस्पताल
अभी दशहरा मेले की तैयारियां की जा रही है। शंभूपुरा सहित सभी प्रभावित वार्डों में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
-विवेक राजवंशी, उपमहापौर नगर निगम कोटा
शंभूपुरा में कई गंभीर समस्याएं हैं। आज बोर्ड बैठक में भी वार्ड की समस्याएं उठाई है। यहां पिछले 20-30 सालों से मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सड़क, नाली और नेटवर्क की समस्या ज्वलंत है। बारिश के दिनों में तो पैदल निकलना ही दुभर हो जाता है। वार्ड का विकास करवाना ही मेरी प्राथमिकता है।
-ज्योतु प्रकाश मीणा, पार्षद वार्ड-1 नगर निगम

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