उप्र विधानसभा चुनाव: एसआईआर और यूजीसी को लेकर बढ़ी भाजपा की चिंता, भ्रामक सूचनाओं से दूर रहने की अपील
बूथ स्तर पर मजबूती और युवाओं से संवाद बढ़ाने पर जोर
लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम और अयोध्या में चंदा चोरी के आरोप जैसे मुद्दों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर चिंता सामने आई है। पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारियों ने मंगलवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने इन मुद्दों को लेकर अपनी आशंकाएं रखीं। संगठन में हाल में हुए व्यापक फेरबदल के बाद नवनियुक्त प्रभारियों और सह प्रभारियों की यह पहली औपचारिक सामूहिक बैठक थी। नवीन ने प्रभारियों से राज्यों की जमीनी स्थिति खुलकर सामने रखने को कहा। भाजपा सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर समेत चुनावी राज्यों के प्रभारियों ने एसआईआर को संभावित चुनावी मुद्दे के रूप में उठाया।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को विपक्ष द्वारा उठाए जाने के कारण जनता के बीच भ्रम और आशंका पैदा हो रही है। उत्तर भारत के कुछ प्रभारियों ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी चिंता जताई और इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई। बैठक में अयोध्या में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी चर्चा में आया। प्रभारियों ने इसे लेकर भी अपनी आशंकाएं नेतृत्व के सामने रखीं। नबीन ने प्रभारियों से कहा कि विपक्ष की ओर से फैलायी जा रही नकारात्मक सूचनाओं का तथ्यात्मक जवाब जनता तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने एसआईआर के संबंध में निर्वाचन आयोग की ओर से स्पष्ट की गयी स्थिति को भी लोगों के सामने रखने को कहा। साथ ही चुनावी राज्यों में आपसी कलह, अंदरूनी खींचतान और भितरघात को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। बैठक में उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच कथित दूरी को लेकर चल रही चर्चाओं का मुद्दा भी उठा। एक प्रभारी ने कहा कि ऐसी खबरें पार्टी के लिए परेशानी पैदा करती हैं।
इस पर नवीन ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा आशीर्वाद प्राप्त है और इस तरह की भ्रामक सूचनाओं का प्रतिकार किया जाना चाहिए। उन्होंने बिहार के प्रभारी हरीश द्विवेदी से कहा कि बिहार को उत्तर प्रदेश से अलग दृष्टिकोण से देखना होगा और वहां की जातीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की जाए। नवीन ने प्रभारियों को नियमित रूप से राज्यों का दौरा करने, युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने और बूथ स्तर की बैठकों में उनकी राय को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने कहा कि युवाओं की अपेक्षाओं को राज्य सरकारों तक पहुंचाने के साथ उसका ब्योरा केंद्रीय नेतृत्व को भी दिया जाए। सत्ता वाले राज्यों में सरकार और संगठन के बीच मतभेद को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया।
इधर,उत्तर प्रदेश में भाजपा के एक विधायक ने भी स्वीकार किया कि यूजीसी का मुद्दा गांव गांव तक पहुंच गया है। आने वाले चुनाव में यह मुद्दा पार्टी के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसको लेकर पार्टी को फीडबैक दिया जा चुका है। खास तौर से सवर्ण मतदाताओं के मन से यूजीसी का भ्रम दूर नहीं हुआ तो पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। गौरतलब है कि मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में करीब चार घंटे चली बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश और सौदान सिंह भी मौजूद रहे। d

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