बाहर से कई उत्सव आए, राजस्थान में समाए! गरबा की ड्रेस, चनिया-चोली, कुर्ते, आभूषण, जूते, मेकअप और पारंपरिक सामान की मांग रहती है उफान पर
राजस्थान में अन्य राज्यों के पर्वों की बढ़ती लोकप्रियता
जयपुर। राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं में देश के अन्य राज्यों के प्रमुख पर्व भी अपनी जगह बना रहे हैं। महाराष्ट्र का गणेश उत्सव, पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा, बिहार और उत्तर प्रदेश की छठ पूजा और गुजरात का गरबा-नवरात्र उत्सव अब राजस्थान के शहरों से होता हुआ गांवों में भी दस्तक देने लगा हैं। इन पर्वों ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ बाजार, पर्यटन, खान-पान, सजावट, कपड़ा, फूल, मूर्तिकला और मनोरंजन से जुड़े कारोबार को भी रफ्तार दी है।
गणेशोत्सव पर दस दिन तक उल्लास
गुलाबी नगरी सहित प्रदेश के कई शहरों में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के साथ दस दिनों तक विभिन्न आयोजन होने लगे हैं। महाराष्ट्र से शुरू गणेशोत्सव की सार्वजनिक परंपरा अब राजस्थान में भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। गणेश प्रतिमाओं, पूजा सामग्री, फू ल-माला, सजावटी सामान, लाइटिंग, साउंड सिस्टम और प्रसाद से जुड़े कारोबारियों को इस दौरान अतिरिक्त काम मिलता है। हालांकि, राजस्थान में गणेश चतुर्थी के दिन ही घर के द्वार पर गणपति को पूजने की परम्परा रही हैं।
दुर्गा पूजा ने भी बनाया खास स्थान
पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा भी राज्य में खास पहचान बना चुकी हैं। गुलाबी नगरी सहित अन्य शहरों में बंगाली समाज के साथ स्थानीय लोग भी दुर्गा पूजा में भाग लेते हैं। पूजा पंडालों की सजावट, दुर्गा प्रतिमा, विद्युत सज्जा, फूल, वस्त्र और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बड़ी राशि खर्च होती हैं। दुर्गा पूजा के दौरान बाजारों में कपड़े, आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन, मिठाई और खान-पान की दुकानों पर भी बिक्री बढ़ती हैं।
गरबा से बढ़ा फैशन और इवेंट कारोबार
गुजरात का गरबा और डांडिया तेजी से लोकप्रिय हुए पर्वों में शामिल हैं। प्रदेश के कई शहरों में बड़े गरबा आयोजन होते हैं। इसके चलते गरबा ड्रेस, चनिया-चोली, कुर्ते, आभूषण, जूते, मेकअप और पारंपरिक सामान की मांग बढ़ जाती हैं। आयोजन स्थलों की बुकिंग, साउंड, लाइट, मंच, कलाकारों और खान-पान पर भी बड़ी राशि खर्च होती है। स्थानीय इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, डीजे, कलाकारों, फोटोग्राफ रों, कैटरिंग संचालकों और सजावट कारोबारियों के लिए भी बाजार तैयार किया है।
छठ पूजा से बढ़ी पूर्वांचली गतिविधियां
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़े परिवारों की बड़ी संख्या के कारण छठ पूजा भी प्रदेश के शहरों में तेजी से बढ़ रही है। छठ पूजा के लिए फल, गन्ना, टोकरी, मिट्टी के बर्तन, पूजा सामग्री और कपड़ों की खरीदारी होती हैं। घाटों और पूजा स्थलों पर सजावट और प्रकाश व्यवस्था पर भी खर्च होता है। उत्तरप्रदेश और बिहार से जुड़े लोग छठ महोत्सव में जब कार्यक्रम करते हैं तो राजस्थान के लोग भी पूरी शिद्दत से सहभागी होते हैं।
त्योहारों से करोड़ों की आर्थिक गतिविधियां
विशेषज्ञों का मानना है कि इन पर्वों का आर्थिक आकार केवल पूजा सामग्री की बिक्री तक सीमित नहीं हैं। प्रतिमा निर्माण से लेकर परिवहन, पंडाल, टेंट, लाइट, साउंड, फूल, कपड़े, मिठाई, खान-पान, होटल, ऑटो-टैक्सी, पार्किंग, इवेंट मैनेजमेंट और डिजिटल प्रचार तक हजारों कारोबार और रोजगार इससे जुड़े हैं। खास बात यह है कि इन पर्वों के माध्यम से राजस्थान के व्यापारी दूसरे प्रदेशों की परंपराओं से जुड़े उत्पादों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करा रहे हैं।

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