आरक्षण महिलाओं का, प्रचार की कमान साहब के हाथ : चुनावों की तारीख तय नहीं, फिर भी गांवों में पंचायत चुनाव का चढ़ा रंग
वोटों के लिए मान-मनुहार
जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की आहट अब गांवों की गलियों तक साफ दिखाई देने लगी है। आरक्षण की लॉटरी के बाद चुनावी तस्वीर साफ हो चुकी है और संभावित प्रत्याशियों ने अपने क्षेत्रों में प्रचार तेज कर दिया है। गांवों में जगह-जगह होर्डिंग बैनर और पोस्टर नजर आने लगे हैं। लेकिन इस चुनाव में एक दिलचस्प तस्वीर भी सामने आ रही है कि आरक्षण भले महिलाओं के नाम हुआ हो, लेकिन प्रचार का मोर्चा कई जगह उनके पति और परिवार के पुरुष सदस्यों ने संभाल लिया है। पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान राजस्थान में लंबे समय से लागू है।
वोटों के लिए मान-मनुहार...
गांवों में चुनावी प्रचार के दौरान कई जगह ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है कि महिला प्रत्याशी के नाम से पोस्टर लगा है, लेकिन पोस्टर में उनके साथ पति की तस्वीर भी प्रमुखता से दिखाई दे रही है। कहीं-कहीं पति का नाम भी बड़े अक्षरों में लिखा है। घर-घर संपर्क और मतदाताओं से मान-मनुहार में भी पति या परिवार के अन्य पुरुष आगे दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में गांवों की चुनावी चर्चा में एक नया सवाल तैर रहा है कि चुनाव प्रत्याशी का है या परिवार का। हालांकि यह हर महिला प्रत्याशी के बारे में सामान्य निष्कर्ष नहीं है। अनेक महिलाएं खुद भी सक्रिय रूप मतदाताओं से सीधे संपर्क कर रही हैं। लेकिन जहां पति प्रचार की पूरी कमान संभाल रहे हैं, वहां महिला आरक्षण के वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य को लेकर बहस भी शुरू हो सकती है।
आरक्षण से बदली गांव की सियासत :
आरक्षण की लॉटरी ने कई पुराने दावेदारों का गणित बदल दिया है। जिस सीट पर सालों से तैयारी कर रहे पुरुष दावेदार मैदान से बाहर हुए, वहां उनकी पत्नी, बहू या परिवार की किसी महिला सदस्य को प्रत्याशी बनाने की कवायद शुरू हो गई। यही वजह है कि कई गांवों में चेहरा नया, राजनीतिक टीम पुरानी दिखाई दे रही है। फिलहाल गांवों में चुनावी माहौल का दिलचस्प दृश्य यही है कि नाम महिला का, आरक्षण महिला का, सीट महिला कीय्, लेकिन कई जगह चुनावी कमांड सेंटर पति के हाथ में! अब मतदाता तय करेंगे कि उन्हें पोस्टर का चेहरा देखना है या उस चेहरे के पीछे खड़ी पूरी राजनीतिक टीम को।
किस पद पर कितनी महिलाएं :
इस बार पंचायतीराज चुनाव में महिलाओं की बड़ी भागीदारी दिखाई देगी। प्रदेश में 14 हजार 403 सरपंच पदों में करीब 7 हजार 200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए। करीब एक लाख 30 हजार वार्ड पंच पदों में 65 हजार से अधिक पद महिलाओं के हिस्से में आएंगे। इसी तरह 457 पंचायत समितियों में 221 प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं।
पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर भी तस्वीर बड़ी है। प्रदेश में 8,245 पंचायत समिति सदस्य पद और 1,403 जिला परिषद सदस्य पद हैं। जिला प्रमुख के 41 पदों के लिए भी महिलाओं का आरक्षण लागू है। आरक्षण चक्र के तहत इस बार कई जिलों में जिला प्रमुख पद महिला श्रेणी में आए हैं। यानी गांव के वार्ड से लेकर जिले के शीर्ष पंचायतीराज पद तक महिलाओं की बड़ी राजनीतिक मौजूदगी होगी।

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