रितु बराला को लेकर कमिश्नरेट पहुंचे थे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष, एफआईआर दर्ज नहीं होगी तो घर नहीं जाएंगे : डोटासरा
देर रात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी पहुंचे
जयपुर। एनएसयूआई कार्यकर्ता रितु बराला के साथ दिल्ली में कथित मारपीट के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सोमवार देर रात पुलिस कमिश्नरेट में धरना देते हुए कहा कि वे रात भर धरना देंगे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल से फोन पर बात कर कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, वे घर नहीं जाएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जयपुर पहुंचने का आह्वान करते हुए कहा कि मंगलवार को पुलिस कमिश्नरेट का घेराव किया जाएगा।
डोटासरा के साथ कांग्रेस की लीगल टीम, विधायक रफीक खान, अमीन कागजी, जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा और रितु बराला मौजूद थीं। इससे पहले प्रतिनिधिमंडल ने मोती डूंगरी थाने में लिखित शिकायत दी थी। वहां से कमिश्नरेट जाने को कहे जाने पर सभी पुलिस मुख्यालय पहुंचे। डोटासरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली में वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान महिला कांस्टेबल ने रितु बराला के साथ मारपीट की और उनका गला दबाया। डोटासरा ने कहा कि या तो हमारी एफआईआर दर्ज होगी या हम पर एफआईआर दर्ज होगी। उन्होंने बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी उन्हें फोन कर मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। देर रात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे। वे कुछ समय बाद वापस लौट गए। एफआईआर दर्ज नहीं होने के बाद देर रात एक बजे बाद तमाम कांग्रेस नेता कमिश्नरेट में गद्दे लगाकर धरने पर बैठ गए और ‘रघुपति राघव राजा राम’... की रामधुनी करने लगे।
एफआईआर दर्ज होने पर गहलोत ने सरकार पर हमला बोला
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सरकार पर हमला बोलते कहा कि गोविन्दसिंह डोटासरा धरने पर बैठे हैं, क्योंकि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। गहलोत ने याद दिलाया कि उनके शासन में अनिवार्य एफआईआर का फैसला लिया था, जिसमें गरीब, दलित, आदिवासी और पिछड़ों को थाने में परेशानी नहीं होती थी। उन्होंने पूछा कि भाजपा सरकार ने इसे क्यों हटाया? हटाने के बाद स्थिति बिगड़ी है। अगर अनिवार्य एफआईआर होती तो धरने की नौबत ही नहीं आती।

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