पंचायत चुनाव की तकदीर, 15 नवंबर की लकीर : आरक्षण पूरा, अब तारीख की बारी, अक्टूबर में घोषणा के संकेत
नवंबर के पहले-दूसरे सप्ताह में मतदान की तैयारी
जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर अब इंतजार अंतिम दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। गांवों की सरकार के चुनाव के लिए आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम तैयार करने की कवायद में जुटा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करने की समय-सीमा तय कर रखी है। ऐसे में अब सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी समय-सीमा के भीतर प्रदेश की 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों सहित पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव कराने की है।
मौजूदा संकेतों के अनुसार, अक्टूबर में चुनाव कार्यक्रम घोषित हो सकता है और नवंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में मतदान कराया जा सकता है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग ही करेगा।
31 जुलाई से 15 नवंबर तक पहुंची डेडलाइन :
पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने पहले 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने की समय-सीमा तय की थी। बाद में सरकार की ओर से चुनावी तैयारियों, परिसीमन और आरक्षण संबंधी प्रक्रियाओं सहित अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए समय-सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट के समक्ष पेश रोडमैप में पंचायती राज चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और 15 नवंबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की बात कही गई। इसके बाद अब आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
14,403 गांवों में चुनी जाएगी गांव की सरकार :
राजस्थान में इस बार पंचायत चुनाव बेहद बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक अभ्यास होगा। प्रदेश की 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों में सरपंच चुने जाएंगे। इसके साथ ही ग्राम पंचायत वार्डों में पंचों का निर्वाचन होगा। इसके अलावा 457 पंचायत समितियों के 8 हजार 245 वार्ड सदस्यों तथा 41 जिला परिषदों के एक हजार 403 वार्ड सदस्यों का चुनाव होना है। पंचायत समिति सदस्य अपने बीच से प्रधान और जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट जाने की चर्चा, लेकिन पुष्टि नहीं :
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जरूर है कि यदि निर्धारित समय में चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हुआ तो सरकार न्यायिक विकल्प पर विचार कर सकती है। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। लेकिन 30 सितंबर तक सरकार की ओर से 15 नवंबर की समय-सीमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने अथवा समय बढ़ाने के लिए नई याचिका दायर करने की कोई स्पष्ट आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

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