ट्रक-बस का पंजीयन अब वीडियोग्राफी के बिना नहीं, फर्जी पंजीयन पर लगेगी लगाम; चैसिस पर बनने वाले वाहनों की 10 मिनट की रिकॉर्डिंग अनिवार्य, वाहन पोर्टल पर अपलोड होंगे फोटो
1 टीबी की हार्ड डिस्क में सुरक्षित रहेगा रिकॉर्ड
जयपुर। परिवहन विभाग ने राजस्थान में चैसिस पर बनने वाले बस, ट्रक और पिकअप जैसे वाहनों के पंजीयन के समय वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी है। पंजीयन के बाद सिटिंग या लोडिंग स्पेस बढ़ाने के लिए अल्टरेशन करने वालों पर अब शिकंजा कसेगा। अब तक कई बार वाहन को बुलाए बिना केवल कागज देखकर पंजीयन हो जाता था। उड़नदस्ते की कार्रवाई पर मालिक तर्क देते थे कि वाहन विभाग ने ही अप्रूव किया है, जिससे मामले न्यायालयों में लम्बित रहते थे। परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने सभी आरटीओ-डीटीओ को निर्देश दिए हैं।
नए नियम
- निरीक्षण अधिकारी वाहन का भौतिक परीक्षण करेंगे
- प्रत्येक वाहन की न्यूनतम 10 मिनट की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिसमें फ्रंट, रियर, लेफ्ट और राइट साइड व्यू दिखेंगे
- चैसिस, इंजन और मोटर नम्बर, पूरी बॉडी निर्माण व गुणवत्ता तथा प्रमुख सुरक्षा अवयव रिकॉर्ड होंगे
- टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट, फॉर्म 22ए और AIS मानकों के अनुरूप निरीक्षण जरूरी
- पंजीयन फाइल में चारों तरफ के 4 रंगीन फोटो रखे जाएंगे
- निरीक्षक व वाहन के फोटो स्कैन कर वाहन पोर्टल पर अपलोड होंगे, जिसकी तस्दीक संबंधित डीटीओ करेंगे
रिकॉर्ड की सुरक्षा
प्रत्येक आरटीओ-डीटीओ कार्यालय 1 टीबी की हार्ड डिस्क खरीदेगा, जिसमें दिन, महीने और साल के अनुसार फोल्डरवाइज रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहेगी। आईटी शाखा के कार्मिक इसके कस्टोडियन होंगे और ट्रांसफर पर हैंडओवर-टेकओवर होगा। रिकॉर्डिंग नियमित जारी रहे, यह डीटीओ की जिम्मेदारी होगी। हार्ड डिस्क कार्यालय से बाहर नहीं ले जाई जा सकेगी।
जवाबदेही तय
परिवहन मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी न होने या डेटा सुरक्षित न रखने पर परिवहन निरीक्षक और डीटीओ व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसे फिटनेस सेंटरों पर सख्ती जैसा ही कदम माना जा रहा है, जहां 16 फरवरी 2026 से वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई थी।

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